इंदौर. जहां नगर निगम और जिला प्रशासन लक्ष्य के मुताबिक राशनकार्ड नहीं बना पाए, वहीं कुछ राशन के दुकानदार यही काम बखूबी कर रहे हैं। मंगलवार को सिंधी कॉलोनी स्थित जे.के. कम्युनिकेशन पर ऐसा ही एक मामला सामने आया। यहां एक व्यक्ति (जिसने अपना नाम मनीष गुप्ता बताया) दो हजार से ज्यादा ऐसे दस्तावेजों की फोटोकॉपी करवा रहा था जिनमें राशनकार्ड संबंधित जानकारियां थीं।
दस्तावेजों पर नगर पालिक निगम इंदौर का नाम था लेकिन किसी दस्तावेज पर लगे फोटो पर सील नहीं थी। पहली बार पूछने पर उसने स्वयं को निगमकर्मी बताया। बाद में खाद्य प्रभारी से संपर्क की बात कही तो उसका जवाब था मैं निगमकर्मी नहीं निजी कंपनी में कार्यरत हूं। परिचित के कहने पर फोटोकॉपी कराने आया था। परिचित कौन है यह बताने से पहले वह दस्तावेज लेकर भाग निकला।
किशोरों के भी फोटो
दस्तावेज वार्ड- ६१ और ६६ के रहवासियों के नाम पर बने हैं। इनमें अधिकतर पर महिलाओं और नवयुवकों (फोटो देखें तो किशोर) के फोटो हैं। कार्डो पर निगम की ओर से जारी दिनांक और दुकानों का नंबर भी अंकित है।
क्या हैं दस्तावेज
सूत्रों के अनुसार दोनों वार्डो में स्थित राशन दुकान मालिकों ने फोटो कॉपी करवाई। पहले जारी कार्ड गुम चुके हैं फोटोकॉपी के आधार पर नए बनाना हैं, यह कहते हुए वे एक-एक दस्तावेज निगम को सौंपेंगे। कुछ दिनों में कार्ड भी बन जाएंगे। सभी दस्तावेजों पर जारी दिनांक १९९७ से २क्क्७ की लिखी हुई है।
क्या है मकसद
राशन कार्ड बनने के बाद जिला प्रशासन से मिलने वाले राशन की मात्रा बढ़ जाएगी। कार्ड फर्जी होने के कारण इस राशन की कालाबाजारी आसानी से हो सकेगी।
किसी काम के नहीं ऐसे कार्ड
निगम के खाद्य प्रभारी अनिल बिंदल के अनुसार यदि कोई फर्जी राशन कार्ड बनवा भी ले तो उन पर दुकानों का अलॉटमेंट निगम करता है। इसकी एक सूची जिला प्रशासन को सौंपी जाती है, बाद में राशन जारी होता है। सभी कार्डो की जानकारी निगम के पास पंजिबद्ध रहती है। ऐसे में यदि कोई फर्जी कार्ड बनवा भी रहे हैं तो वे किसी काम के नहीं।