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प्रदेश में फिर बिजली संकट

बिलासपुर. औद्योगिक क्षेत्रों में होने वाली कटौती कितने घंटों की होगी यह प्रतिदिन के उत्पादन व खपत के आधार पर तय होगी, लेकिन कटौती होगी यह तय है। आज की स्थिति में प्रदेश में 2150 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है, लेकिन खपत 23 सौ मेगावाट है। विद्युत मंडल के अनुसार बिजली संकट का किसी भी तरह प्रभाव शहरी व ग्रामीण आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा।

प्रदेश में हर साल की तरह इस साल भी बिजली का संकट शुरू हो गया है। बीते वर्ष गर्मी में 18 सौ मेगावाट बिजली पैदा हो रही थी, वहीं खपत 22 सौ मेगावाट थी। इधर विद्युत मंडल ने कोरबा में 250 मेगावाट के दो संयंत्र प्रारंभ होने एवं जिंदल से तीन सौ मेगावाट बिजली की खरीदी करने के कारण इस साल गर्मी में बिजली की कमी नहीं होने की बात कही थी, लेकिन स्थिति इस साल भी वही है।

टीक लोड (शाम के समय) में बिजली संकट से निपटने के लिए औद्योगिक क्षेत्रों में शाम छह बजे से कटौती शुरू की जाती है, जो दो से छह घंटों तक की होती है। कटौती का घंटा प्रतिदिन के उत्पादन पर आधारित होता है।

चालू रहेंगे एसी-कूलर व सिंचाई पंप : विद्युत मंडल के अनुसार विद्युत संकट का प्रभाव शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा। ऐसी स्थिति में शहरी उपभोक्ताओं को गर्मी में एसी-कूलर व किसानों को सिंचाई पंप के लिए भरपूर बिजली मिलेगी।





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