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रेल पटरियों में छिपा है मौत का राज!

हनुमानगढ़:जिले में ट्रेन से कटकर मरने वालों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हो रही है। गत वर्ष 35 व्यक्तियों की ट्रेन से कटकर मौत हो गई, जिसमें 20 लोगों की अभी तक शिनाख्त नहीं हो पाई है, जबकि इस वर्ष अभी तक सात मौते हो चुकी हैं। ऐसे मृतकों के सभी राज रेल पटरियों में ही दफन हो गए। वहीं पुलिस के सामने यह परेशानी आती है कि ट्रेन से कटने के बाद शव के टुकड़े हो जाते हैं, जिससे आदमी की शिनाख्त सही नहीं हो पाती है तथा न ही ऐसे शवों को पहचान के लिए अधिक दिनों तक रखा जा सकता है। स्थिति यह है कि कुछ शवों का घटना स्थल पर ही पोस्टमार्टम करवा दिया जाता है। इसके बाद शव नगरपालिका के सुपुर्द कर दिया जाता है।

हत्या या आत्महत्या?अधिकांश मामलों में रेल से कटकर मरने वालों के बारे में मौत के कारणों का पता नहीं चल पाता है। पुलिस ऐसे मामलों की तफ्तीश कर मृतक की हत्या अथवा आत्महत्या के कारणों का पता लगाने का प्रयास करती है। पुलिस का मानना है कि कई बार हत्या के बाद हत्यारे अपराध छिपाने की मंशा से शवों को रेल पटरियों पर डाल देते हैं लेकिन हनुमानगढ़ जिले में अभी तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है फिर भी पुलिस रेल से कटकर मरने के मामले में इस नजरिए से भी जांच करती है।

अज्ञात शवों को लेकर पुलिस चिंतिततीन वर्षो में 104 लोगों ने ट्रेन से कटकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। खास बात यह है कि इसमें से अभी तक 53 शवों की पहचान नहीं हो पाई है। रेलवे पुलिस (जीआरपी) अज्ञात शवों को लेकर काफी चिंतित है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अज्ञात शवों से सबसे ज्यादा परेशानी होती है क्योंकि अज्ञात शवों का पोस्टमार्टम से लेकर अंतिम संस्कार तक उन्हें करवाना पड़ता है। उन्हें अलग से कोई बजट नहीं दिया जाता है।

रेलवे की तरफ से कोई सुविधा नहींपुलिस अधिकारियों कि मानें तो रेलवे विभाग की तरफ से उन्हें कोई सुविधा मुहैया नहीं करवाई जाती है। घटना स्थल पर जाने के लिए ट्रेन का सहारा लेना पड़ता है। शवों को घटना स्थल से राजकीय चिकित्सालय तक लाने के लिए सरकार की तरफ से दो सौ रुपए दिए जाते हैं जो कि अपर्याप्त हैं।





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