जयपुर: राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया है कि निवेश व रोजगार की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए ही प्रतापनगर में आईसीआईसीआई बैंक को जमीन आबंटित करने का फैसला लिया था। इससे सरकार के आर्थिक कोष पर भी कोई अतिरिक्त भार भी नहीं पड़ता।
हाईकोर्ट के निर्देश पर सरकार ने यह जवाब मंगलवार को न्यायाधीश आरएम लोढ़ा व आरएस राठौड़ की खंडपीठ में पेश किया, जबकि हाउसिंग बोर्ड ने अदालत से दो हफ्ते और मांगे हैं। मामले की अगली सुनवाई 22 मई को होगी।
सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता भरत व्यास ने बताया कि आईसीआईसीआई बैंक को जमीन आबंटन का नीतिगत फैसला 5 मार्च 08 को बीडी की बैठक में लिया गया था। यह जनहित में था क्योंकि इससे राज्य में 500 करोड़ रुपए का निवेश होने के अलावा 5 हजार से 20 हजार लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
सरकार ने यह भी कहा कि हाउसिंग बोर्ड राज्य सरकार की परिभाषा के अंतर्गत आता है और सुप्रीमकोर्ट ने भी हाउसिंग बोर्ड बनाम जीएस इन्वेस्टमेंट मामले में स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार हाउसिंग बोर्ड को निर्देश दे सकती है। हाउसिंग बोर्ड की इस 83 हजार वर्गमीटर जमीन को जेडीए को स्थानांतरित करने के बदले जेडीए ने हाउसिंग बोर्ड के लिए 100 एकड़ जगह चिन्हित भी कर ली है। सरकार ने आगे बताया कि 83 हजार वर्गमीटर में से 14 हजार 630 वर्गमीटर जमीन पर अतिक्रमण हैं। याचिकाकर्ता ने अतिक्रमण करने वालों को लाभ पहुंचाने के लिए यह जनहित याचिका दायर की है।
गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 17 अप्रैल को सीताराम की जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद जमीन आबंटन की प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए सरकार से पूछा था कि उसने किस आधार पर आईसीआईसीआई बैंक को जमीन देने का निर्णय लिया।
याचिका में हाउसिंग बोर्ड की डिस्ट्रिक्ट सेंटर के लिए आरक्षित 83 हजार वर्गमीटर जमीन को जेडीए को स्थानांतरित कर इसमें से 17 एकड़ जमीन आईसीआईसीआई बैंक को 1310 रु. प्रति वर्गमीटर की दर पर देने के निर्णय को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता की दलील थी कि बैंक को केवल डेढ़ करोड़ रु. में ही जमीन आबंटित की जा रही है, जबकि जमीन की न्यूनतम बाजार दर 40 हजार रु. वर्गमीटर है। इस दर से जमीन का बाजार भाव करीब 370 करोड़ रुपए है।