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वर्ल्ड‌ क्लास यूनिवर्सिटी के लिए जमीन की खोज शुरू

जयपुर: केंद्र सरकार की ओर से जयपुर में वर्ल्ड‌ क्लास यूनिवर्सिटी बनाने के लिए राज्य सरकार से जमीन मांगे जाने के बाद जेडीए ने 700 एकड़ जमीन चिह्न्ति करने के प्रयास शुरू कर दिए है।

ये प्रयास राज्य सरकार से जेडीए को 15 दिन में भूमि चिह्न्ति करने के निर्देश मिलने के बाद शुरू हुए हैं। जेडीए ने हाल ही शामिल हुए 247 गांवों में जमीन की तलाश शुरू की है।

अतिरिक्त आयुक्त (पूर्व) बी.के. दोसी के अनुसार 26 अप्रैल को उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख शासन सचिव अतुल गर्ग के यहां हुई बैठक में वल्र्ड क्लास यूनिवर्सिटी के लिए 15 दिन में जमीन चिह्न्ति करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार से निर्देश मिलने के बाद जेडीए ने 700 एकड़ जमीन की तलाश शुरू कर दी है। यह जमीन रीजन में हाल ही शामिल हुए नए क्षेत्र में तलाशी जा रही है।

जेडीए सरकार को दो तीन जगह का विकल्प देगा, वल्र्ड क्लास यूनिवर्सिटी कौनसी जमीन पर बनेगी, इसका निर्णय राज्य सरकार की ओर से भेजी जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार करेगी।

नामांतरण खुलना हुआ जरूरी वल्र्ड क्लास यूनिवर्सिटी के लिए राज्य सरकार को जेडीए रीजन में शामिल हुए 247 गांवों की सरकारी जमीनों के नामांतरण का मामला जल्दी निपटाना पड़ेगा। जमीनों का नामांतरण खुले बिना यूनिवर्सिटी को जमीन नहीं दी जा सकती। फिलहाल यह मामला राजस्व विभाग और वित्त विभाग के बीच लटका हुआ है।

गौरतलब है कि राज्य सरकार के सर्कुलर के हिसाब से राजस्व विभाग से जेडीए में शामिल होने वाले क्षेत्र में स्थित सरकारी जमीनों के बदले डीएलसी दर की 40 प्रतिशत राशि सरकारी कोष में जमा कराए बिना जेडीए के नाम नामांतरण नहीं खुल सकता। हालांकि जेडीए ने 12 किस्तों में भुगतान करने का प्रस्ताव सरकार को भिजवाया था, लेकिन अभी तक इस पर फैसला नहीं हुआ।

रिंग रोड के पास मिल सकती है यूनिवर्सिटी को जमीन यूनिवर्सिटी के लिए आसान अप्रोच और जमीन की उपलब्धता को देखते हुए संभवतया प्रस्तावित रिंग रोड के आसपास जेडीए भूमि चिह्न्ति करेगा। हालांकि इस बारे में अभी जेडीए अफसरों ने खुलासा नहीं किया लेकिन जानकारों के अनुसार रिंग रोड से लगती हुई जमीन ही यूनिवर्सिटी के लिए बेहतर साबित होगी।

हो सकती है भूमि अवाप्ति यूनिवर्सिटी के लिए यदि सरकारी जमीन की उपलब्धता कम पड़ती है तो आसपास की जमीन को अवाप्त किया जाएगा। दोसी ने बताया कि 700 एकड़ जमीन एक साथ उपलब्ध नहीं हुई तो आसपास के किसानों की जमीन अवाप्त की जाएगी।





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