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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. पार्क्स, ग्रीन बेल्ट्स के लिए पहचाने जाने वाले शहर के लोगों को अब ग्रीनरी मुफ्त में नसीब नहीं होगी। पानी के बिल के साथ ग्रीनरी के 15 रुपए महीने के हिसाब से साल के 180 रुपए भी देने होंगे। पब्लिक हेल्थ और हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट में इसकी प्रक्रिया चल रही है। वहीं, नगर निगम शहर के पार्र्को और ग्रीन बेल्ट्स के रखरखाव के लिए मालियों की आउट सोर्सिग करेगा।
कैसे इकट्ठा होगा पैसा : शहर में 1.26 लाख वाटर कंज्यूमर हैं। ग्रीनरी मेन्टेन करने के लिए वाटर कंज्यूमर से 15 रुपए हर महीने चार्ज करने की मुहर निगम सदन ने लगाई थी। निगम के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर कंस्ट्रक्शन योगेश गुप्ता ने प्रपोजल बनाकर निगम के पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट के एसई आरसी दीवान को भेजी है। इसे वाटर बिल के किस हेड में शामिल किया जाना है यह काम पब्लिक हेल्थ को देखना है।
एक साल तक फाइलों की वर्किग के बाद निगम ने ग्रीन बेल्ट व पार्र्को की मेंटेनेंस आउटसोर्स करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सेक्टर-46ए और बी की ग्रीन बेल्ट, सेक्टर-46 सी एंड डी (गार्डन्स ऑफ श्रब), सेक्टर-32ए, बी और सी, डी की ग्रीन बेल्ट, सेक्टर-47सी एंड डी की ग्रीन बेल्ट की मेंटेनेंस का टेंडर भी फ्लोट कर दिया है।
ग्रीनरी पर सेस लगाने वाला पहला शहर
चंडीगढ़. चंडीगढ़ ग्रीन बेल्ट और पार्क्स की ग्रीनरी के रखरखाव पर लोगों पर सेस लगाने वाला देश का पहला शहर और नगर निगम होगा। वैसे भी शहर ग्रीनरी के मामले में देश में अव्वल है। इसके एरिया का 33.5 फीसदी ग्रीन है।
इसे बनाए रखने के लिए अब नगर निगम शहर के 1.26 लाख वाटर कंज्यूमर्स की जेब से पैसा लेगा। इससे सालाना होने वाले 2 करोड़ 26 लाख 80 हजार रुपए से ग्रीन बेल्ट्स और पार्क्स में पेड़ पौधे, फूल, शर्ब और घास लगाने के लिए कर्मचारियों को आउट सोर्सेज पर तैनात करेगा।
>> वाटर कंज्यूमर से पैसे लेने की प्रपोजल एसई के जरिए पब्लिक हेल्थ विभाग को भेजी गई है। जल्द ही ग्रीनरी के नाम पर पैसे इकट्ठा होने लगेंगे।
अरुण कांसल, एक्सईएन हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट नगर निगम