वाशिंगटन. जापानी वैज्ञानिकों ने चूहों के व्यवहार के एक नए मॉडल का ईजाद किया है जिसकी मदद से मानसिक रोगों के इलाज में सहज बनाया जा सकता है।
टोक्यो विश्वविद्यालय और ओसाका बायोसाइंस इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने चूहे के व्यवहार का समग्र अध्ययन किया और इसके रोचक निष्कर्ष ने उन्हें चकित कर दिया।
शोधकर्ताओं ने प्रेशर सेंसर तकनीकी की मदद से चूहों की 24 घंटे तक निगरानी की। उन्होंने पाया कि चूहों की दैनिक गतिविधियों (सिरकाडाइन रिदम) के लिए जिम्मेदार जीन को हटाने के बाद उनकी स्थिति ठीक वैसी ही हो गई जैसे की शोधकर्ताओं ने अवसाद से घिरे लोगों में देखा था।
शोधकर्ताओं ने 24 घंटे तक चूहों की एक-एक गतिविधि की निगरानी की और फिर उसका मनुष्यों की जीवनशली के साथ तुलना किया।
शोधकर्ताओं की दूसरी टीम ने ठीक वैसा ही अध्ययन मनुष्यों के 24 घंटे की गतिविधियों का भी किया।
शोधकर्ताओं के निष्कर्ष आश्चर्यजनक थे। उन्होंने पाया कि मनुष्यों और चूहों के व्यवहार के आंकड़ों में कोई अंतर नहीं पाया गया। इस अध्ययन के निष्कर्ष जर्नल ‘प्लास वन’ में प्रकाशित हुई है।