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आईएएस ने जड़े मंत्री पर आरोप

जयपुर: राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत कृषि मंत्री के चहेते लोगों ने कीटनाशकों के नाम पर करोड़ों रुपए का फर्जी अनुदान उठा लिया। उद्यान विभाग के तत्कालीन सचिव आर.एस. गठाला ने जब 100 करोड़ के घोटाले की आशंका जताते हुए कृषि और सहकारिता विभाग को विस्तृत जांच कर कार्रवाई करने के लिए लिखा तो सरकार ने उल्टे उनका ही तबादला कर दिया। उस समय सहकारिता विभाग भी सैनी के ही पास था।

हुआ यह कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन ने वर्ष 2006-07 में राज्य के सत्रह जिलों में मसाला फसलों में रोग लगने पर कीटनाशकों की खरीद पर 75 प्रतिशत तक अनुदान देने की योजना चला रखी थी। यह राशि करीब साढ़े ग्यारह हजार रुपए प्रति हैक्टेयर बैठता है। इस योजना के तहत ग्राम सेवा सहकारी समितियों के व्यवस्थापकों को यह अनुदान उपलब्ध कराया जाना था। इसमें 25 प्रतिशत राशि खुद किसानों को वहन करनी थी।

फार्मो में ये थी गड़बड़ियां:अनुदान फार्मो में न तो फसलों में लगने वाले रोग का कोई विवरण था। न ही इस बात की कोई सूचना अंकित थी कि कितने हैक्टेयर में कौन सी फसल की बुवाई की गई थी। अधिकांश फार्मो पर एक ही तरह के हस्ताक्षर थे।जांच करने वाले अधिकारी की जिम्मेदारी थी: सैनीकृषि मंत्री प्रभूलाल सैनी का कहना है कि फर्जी अनुदान उठाने संबंधी कोई जानकारी उन्हें नहीं हैं। इस बार में न तो किसी किसान ने आज तक उनसे शिकायत की है और न ही अफसरों ने उन्हें बताया है। मेरा कोई परिचित या जानकार इसमें शामिल है तो उसके खिलाफ तत्कालीन सचिव को एफआईआर दर्ज करानी चाहिए थी। यदि गठाला ने इस प्रकरण में कोई जांच की थी तो उन्हें फर्जी अनुदान उठाने वालों के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करानी चाहिए थी। ऐसा नहीं करके उन्होंने खुद लापरवाही की है। काम में लापरवाही करने के लिए संबंधित अफसरों पर कार्रवाई की जाएगी। किसी भी दोषी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।

ऐसे हुआ अनुदान राशि का घोटालाउद्यान विभाग और सहकारी समितियों के साथ मिलीभगत करके कुछ कीटनाशक विक्रेताओं ने किसानों के नाम पर से फर्जी फार्म भरकर अनुदान उठा लिया। इन लोगों ने किसानों के हिस्से की 25 फीसदी राशि अपने पास से जमा करवा दी और अनुदान राशि उठा ली। इसके बाद उद्यान सचिव ने कोटा और सीकर में भी जांच करवाकर कार्रवाई करने के लिए कहा तो उसमें भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

ऐसे खुला फर्जी अनुदान का मामलाये फार्म जब उद्यान सचिव तक आए तो उन्हें इसमें घोटाले की आशंका लगी। इस पर उन्होंने किसानों से जब भौतिक सत्यापन कराना चाहा तो पता चला कि किसानों को इसकी जानकारी ही नहीं थी कि ऐसा कोई अनुदान भी मिलता है। इस पर उद्यान सचिव ने संबंधित जिला कलेक्टरों, कृषि और सहकारिता विभाग को विस्तृत जांच करके कार्रवाई करने को लिखा।

चोरों को चांदनी रात नहीं सुहाती : गठालासचिव आरएस गठाला ने भास्कर को बताया कि उन्होंने हार्टीकल्चर में आने के बाद गलत तरीके से पैसे उठाने का रास्ता बंद कर दिया था। अनुदान उठाने में कई शतेर्ं लगा दी थी। शिकायतों के बाद जांच कराई तो पता लगा कि अनुदान फर्जी हस्ताक्षरों से उठे हैं, किसानों तक पहुंचे ही नहीं।

आपने क्या किया? : मैं क्या करता? मैं कोटा में इंस्पेक्शन करके आया था। कुछ गड़बड़ भी पाई थी, इससे पहले कि मैं कुछ करता, मुझे सरकार ने हटा दिया। यह पूछने पर कि आपको क्यों हटाया? उन्होंने कहा- चोरों को चांदनी रात नहीं सुहाती। इसलिए हटा दिया। मैंने कलेक्टरों को भी जांच के लिए लिखा। कॉआपरेटिव और कृषि विभाग को भी लिखा पर सरकार चुप रही। किसी भी स्तर पर जांच नाम की चीज ही नहीं हुई। मेरे समय जांच इसलिए नहीं हो सकी क्योंकि मुझे दूसरे ही दिन हटा दिया गया।

मंत्री कह रहे हैं कि सारी बात सही नहीं है?मैंने जो लिखा है और बताया है, वह अगर झूठ निकल जाए तो इस्तीफा देकर घर चला जाऊंगा। मंत्रीजी कहते हैं कि मेरी आत्मा होर्टीकल्चर में ही घूमती है। मैं किसान का बेटा हूं इसलिए शुरू से ही इसमें रचा-बसा हूं लेकिन कहने वाले खुद की आत्मा टटोल तो लें।





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