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कठिन श्रम के प्रति समर्पण है जरूरी

लीडरशिप मंत्र. समर्पण एक ऐसा शब्द है, जिसे हम अपनी जिंदगी के विभिन्न पड़ावों पर दूसरों के मुंह से सुनते आते हैं। कभी स्कूल में, तो कभी घर पर या कभी ऑफिस में। आज के संदर्भो में यह बहुत सामान्य शब्द बनकर रह गया है। लेकिन वास्तव में यह किसी भी साधारण शख्स को असाधारण बनाने का मंत्र है। हममें से अधिकांश के ख्वाब बहुत बड़े होते हैं, लेकिन हम उन्हें बगैर कठिन श्रम के ही हासिल करना चाहते हैं।

इस बाबत मैं एक घटना बताना चाहता हूं, जो मेरे साथ कक्षा आठ के दौरान पेश आई थी। मेरा एक दोस्त स्कूल की बास्केट बॉल टीम में था। वह हर रोज सुबह ठीक 6.30 बजे नियम से बास्केट बॉल कोर्ट आता और एक घंटे तक बॉल को नेट में डालने का अभ्यास करता था। उसे कोई भी गंभीरता से नहीं लेता, लेकिन वह मानो सिर्फ अपने लिए खेलने आता था। मैं सोचता था कि आखिर यह क्यों इतना श्रम कर रहा है। खासकर जब इसके लिए उसे कोई सराहना या प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है। इस तरह वह अपना समय क्यों बर्बाद कर रहा है?

लेकिन मेरी यह धारणा तब गलत साबित हो गई, जब अंतर कॉलेज टूर्नामेंट में वह बॉस्केट बॉल टीम को मिली जीत का हीरो साबित हुआ। वह मैदान के किसी भी हिस्से से सीधे बॉल को नेट में डालकर विरोधी टीम की शिकस्त का नायक बना। अच्छी बात यह थी कि वह बहुत लंबा नहीं था, बल्कि उसकी ऊंचाई औसत ही थी। इससे मुझे समझ आया कि नियमित अभ्यास और समर्पण किसी भी चीज के लिए बहुत जरूरी है। आप जिस क्षेत्र में भी हों, लेकिन अभ्यास ही लीडर बनाता है और आगे बढ़ने में मददगार साबित होता है।

-लेखक नेतृत्व प्रशिक्षण संस्था लीडकैप के संस्थापक हैं।





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