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खात्मे को लेकर अब डीजीपी को नोटिस!

भोपाल. लोकायुक्त जस्टिस रिपुसूदन दयाल ने पुलिस से पूछा है कि अब तक प्रदेश में कितने मामलों में खात्मा रिपोर्ट बनाई गई और उनमें से कितनी रिपोर्ट अदालत में मंजूरी के लिए पेश की गईं। लोकायुक्त ने पुलिस महानिदेशक आनंद राव पंवार को नोटिस भेजकर यह जानकारी मांगी है।

सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी पन्नालाल की जमीन के एक मामले में भोपाल की मिसरोद पुलिस द्वारा चार साल पहले बनाई गई खात्मा रिपोर्ट को अदालत में पेश नहीं किए जाने पर लोकायुक्त ने एसपी जयदीप प्रसाद से जवाब मांगा था। भोपाल पुलिस ने इसके जवाब में लोकायुक्त को बताया था कि दिसंबर 07 तक 4191 मामलों में भोपाल पुलिस ने खात्मा लगाया, लेकिन इनमें से केवल 245 ही अदालत में पेश किए गए। आंकड़ों को देखने के बाद लोकायुक्त ने डीजीपी श्री पंवार से खात्मा रिपोर्ट में प्रदेश की स्थिति जानना चाही।

पूछा गया है कि अब तक प्रदेश में कितने मामलों में पुलिस ने खात्मे बनाए और उनमें से कितने अदालत में पेश किए गए। सूत्रों के मुताबिक एसपी जयदीप प्रसाद ने खात्मा लगाने के बाद न्यायालय में पेश नहीं करने के लिखित में जो कारण बताए थे, उनमें न्यायालय पर टिप्पणी की गई थीं। इस उत्तर को लोकायुक्त ने भोपाल जिला अदालत को भेज दी। अदालत ने एसपी के तर्को को गलत बताया।

हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

हाईकोर्ट ने भोपाल एसपी से स्पष्टीकरण मांगा है कि एक अफसर के खिलाफ जारी किया गया जमानती वारंट आखिर क्यों तामील नहीं हो पाया? पुलिस की ओर से भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया था कि पीएचई के इंजीनियर इन चीफ अपने कार्यालय में नहीं मिले।

जस्टिस केके लाहोटी ने इस जवाब पर हैरानी जताते हुए न केवल एसपी को शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने कहा, बल्कि संबंधित अफसर सुदेश सक्सेना के खिलाफ फिर से वारंट जारी करने के निर्देश दिए। मामला सिवनी के जल संसाधन विभाग में हैंडपंप मैकेनिक के पद पर कार्यरत कर्मचारियों का है, जिन्होंने वेतनमान को अनुचित बताकर एक याचिका दायर की गई थी।

हाईकोर्ट की एकलपीठ ने उक्त याचिका पर 28 जुलाई 2006 को फैसला सुनाते हुए कहा था कि यदि याचिकाकर्ता योग्य पाए जाते हैं तो उन्हें हैंडपंप मैकेनिक पद का वेतनमान दिया जाए। इस आदेश के परिप्रेक्ष्य में आवेदकों ने विभाग को दस अभ्यावेदन दिए। इसके बाद भी उन्हें नया वेतनमान न मिलने पर यह अवमानना याचिका दायर की गई।

मामले पर पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने पीएचई विभाग भोपाल के इंजीनियर इन चीफ सुदेश सक्सेना के खिलाफ वहां के एसपी के माध्यम से जमानती वारंट जारी किया था। मामले पर आगे हुई सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से एक रिपोर्ट भेजी गई कि संबंधित अफसर अपने दफ्तर में नहीं मिले, इसलिए वारंट तामील नहीं हो सका। अदालत ने इस जवाब पर हैरानी जताते हुए भोपाल एसपी से जवाब तलब किया। मामले की अगली सुनवाई 23 जून को होगी।





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