भोपाल.
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि केंद्र सरकार के राज्य विरोधी रवैए के कारण देश के संघीय ढांचे को खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने यह आरोप मध्यप्रदेश के साथ केंद्र के कथित पक्षपात पूर्ण व्यवहार के खिलाफ बुधवार को उपवास शुरू करते हुए लगाया। प्रदेश के इतिहास में यह पहली घटना है जब मुख्यमंत्री समेत पूरी कैबिनेट और सत्तारूढ़ दल ने आक्रमक रूख अपनाया और समूचे राज्य में उपवास पर बैठ गया। सीधी में भाजपा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर समेत मंत्री और पदाधिकारी पूरे 24 घंटे के उपवास पर बैठे हैं।
श्री चौहान ने राजधानी के रोशनपुरा चौराहा पर उपवास शुरू करने के पूर्व सभा को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार आने वाले विधानसभा चुनाव में उन्हें और भाजपा सरकार को बदनाम करने के लिए जनता को उसके हकों से वंचित कर रही है।
श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश के सूखा पीड़ित क्षेत्रों के लिए 1500 करोड़ रुपए और सूखा से निपटने के लिए पांच वर्ष की दीर्घकालीन योजना के तहत 24 हजार करोड़ रूपए की मांग की थी लेकिन मदद के तौर फूटी कौड़ी भी नहीं मिली। अब राज्य के संसाधन भी सूख रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र ने राज्य के कोटे की बिजली में कटौती कर दी, बिजली संयंत्रों को चलाने के लिए कोयला का कोटा काट दिया।
राज्य के हिस्से की 350 मेगावाट बिजली के स्थान पर केवल 31 मेगावाट ही दी जा रही है। केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि बिरसिंहपुर और चचाई पावर प्लांट को पूरा करने में जानबूझकर दरी की जा रही है। उन्होंने बार- बार खराब हो पावर प्लांटों को भी केंद्र की साजिश का हिस्सा बताया है।
श्री चौहान ने सूखा और गरीबों को सस्ते राशन को भी मुद्दा बनाते हुए कहा कि गरीब की रोटी के लिए गेहूं - चावल का कोटा कम कर दिया है। प्रदेश में गरीबी रेखा से जीने वालों की संख्या 61 लाख से अधिक है और केंद्र सरकार केवल 41 लाख लोगों को लिए ही राशन मुहैया कर रही है।
श्री चौहान ने केंद्र सरकार के गरीबी रेखा से नीचे के नियमों का मखौल उड़ाते हुए केंद्र सरकार मानती है कि यदि किसी के घर शौचालय पक्का है या किसी गरीब के घर पंखा है तो वह गरीबी रेखा में नहीं आएगा। उन्होंने कांग्रेस और केंद्र सरकार को चुनौती दी वह चाहे तो गरीबों के नाम सूची में से काट दे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सूखा राहत, बिजली संयंत्रों के लिए कोयला और गरीबों को राशन देने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से लेकर कृषि मंत्री शरद पवार और प्राकृतिक आपदा के मंत्री तक से कई बार मुलाकात की। इसके बाद भी कोई सहायता नहीं दी गई।
एसी हटाने को कहा..
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उपवास स्थल पर अपने लिए लगे विशेष तंबू से एसी हटाने को कहा। उन्होंने कहा कि शिवराज इतना कोमल नहीं है कि वह इस गर्मी में मुरझा जाए। इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा, सह संगठन भगवत शरण माथुर, सासंद रामपाल सिंह, ध्रुवनारायण सिंह, विपिन दीक्षित, जिला अध्यक्ष आलोक संजर, आलोक शर्मा, ओम यादव, शतान सिंह पाल, हीरेंद्र बहादुर सिंह, शैलेंद्र शर्मा, चेतन सिंह, मुख्यमंत्री की पत्नी साधना सिंह, महिला मोर्चा की अध्यक्ष सीमा सिंह, ऊषा चतुर्वेदी आदि मौजूद थी।
दिन भर निपटाते रहे फाइलें
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उपवास स्थल पर जनता से मिलने के साथ सरकारी कामकाज भी करते रहे। इसमें जरूरी फाइलें बीच - बीच में समय निकाल कर गरीबों के इलाज, कन्याओं की शादियों के लिए सहायता के साथ जरूरी तबादले और संदेश से जुड़ी फाइलों पर हस्ताक्षर करते रहे। उनके सचिवालय के एक अधिकारी का कहना था कि मुख्यमंत्री ने करीब तीन सौ से अधिक फाइलें निपटाई।
मजबूरी में एक मुख्यमंत्री और क्या करता
केंद्र सरकार के खिलाफ राजधानी के रोशनपुरा चौराहे पर बुधवार को उपवास पर बैठे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिन भर लोगों से मुलाकात के बीच कहा है कि उपवास करने का निर्णय उनका खुद का था। मजबूरी में एक मुख्यमंत्री के पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। उनके उपवास को समर्थन देने आ रहे लोगों से चर्चा का लब्बो लुआब यही था।
श्री चौहान को समर्थन देने आए वरिष्ठ नेता कैलाश सारंग ने उपवास स्थल पर शाम को मुख्यमंत्री से पूछा- उपवास करना किसके दिमाग की उपज थी? शिवराज बोले- यह निर्णय नितांत मेरा था और सरकार के साथ संगठन ने जब इसे हरी झंडी दे दी तो हमने इसे प्रदेश स्तर पर एक साथ करने का फैसला किया। एक समर्थक ने मुख्यमंत्री से पूछा कि उपवास के बीच काम भी कर रहे हैं, इससे थकान बढ़ रही होगी तो जवाब में शिवराज ने कहा कि जनता के समर्थन ने थकान दूर कर दी है।