HomeNewsMetrosJaipur Jaipur

पांचवीं तक पांच दिन पढ़ाई

जयपुर: छोटे बच्चों को पढ़ाई के बोझ से मुक्त करने के लिए इन दिनों शहर के निजी स्कूल अपने-अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। कुछ स्कूल संचालक प्री-प्राइमरी में पांच दिन का सप्ताह रखते हैं। प्राथमिक स्तर तक यह सिस्टम लागू करने के बारे में सोमवार को स्कूल संचालकों की राय जानी गई। इससे बहुत सी नई बातें सामने आईं। संचालक इसके फायदे और नुकसान पर खुलकर बोले। कुछ ने इसकी आवश्यकता महसूस की तो कुछ संचालकों ने कहा कि ऐसा करना बच्चों के हित में नहीं हो सकता। इसके बजाय स्कूलों में पांच दिन की पढ़ाई रखी जाए तो बच्चों के हित में रहेगी।

स्कूल संचालकों का कहना था कि पांच दिन का सप्ताह रखने से बच्चों को कोई खास फायदा नहीं होने वाला, इसकी बजाय स्कूलों में फाइव डे टीचिंग हो और स्कूलों में कुछ एक्टिविटीज कराई जाए तो बच्चों की प्रतिभा में निखार हो सकता है। हर शनिवार को बच्चों से उनकी रुचि के कार्य कराए जाएं। उन्हें अपनी प्रतिभा उभारने का अवसर दिया जाए तो वे पढ़ाई के साथ-साथ दूसरे क्षेत्रों में भी आगे बढ़ सकते हैं।

हर शनिवार पढ़ाई के इतर गतिविधियां होनी चाहिए
छोटे बच्चों के लिए पांच दिन पढ़ाई के बारे में केंद्रीय विद्यालय के पूर्व प्राचार्य ए.के. गुप्ता ने कहा कि सीबीएसई ने हर कक्षा के लिए कार्यदिवस तय किए हुए हैं। उनमें कमी होने पर समय पर कोर्स पूरा होने में दिक्कत आ सकती है।

एसआरएन इंटरनेशनल स्कूल की प्राचार्य उषा शर्मा ने कहा कि पांच दिन के सप्ताह की बजाय पांच दिन पढ़ाई की जाए तो बच्चों के लिए अच्छा रहे। हर शनिवार को स्कूल में कुछ ऐसी गतिविधियां कराई जाएं, जिसमें बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिले। माहेश्वरी गल्र्स पब्लिक स्कूल की प्राचार्य आशा सहगल ने कहा कि पांच दिन का सप्ताह रखने से बच्चों को ग्रोथ का समय कम मिलेगा।

शनिवार के दिन को पेरेंट्स गंभीरता से नहीं लेंगे और शनिवार के दिन न तो बच्चे खेल ही सकेंगे और न ही पढ़ाई कर सकेंगे। सेंट विल्फ्रेड्स स्कूल सोसायटी के सचिव केशव बड़ाया ने कहा कि प्री-प्राइमरी के बच्चों के लिए पांच दिन का सप्ताह जरूरी है। प्राइमरी तक पांच दिन पढ़ाई ही सवरेत्तम रहेगी। जेवीपी स्कूल प्रतापनगर के डायरेक्टर एल.एस. चौधरी ने कहा कि बच्चों को राहत के लिए सरकार का कदम सही है, लेकिन पढ़ाई के लिहाज से यह ठीक नहीं। स्कूल का समय कम करने से पढ़ाई को हुए नुकसान की भरपाई जुलाई में की जाएगी।

संस्कार स्कूल की प्रिंसिपल रमा दत्त ने कहा कि छुट्टी करने या समय कम करने के बाद भी बच्चे घर में बैठे नहीं रह सकते। फिर इसका कोई अर्थ नहीं रह जाता। हिंदुस्तान इंटरनेशनल एकेडमी के प्रिंसिपल ए.के. गुप्ता ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर स्कूल का समय कुछ दिन तक कम भी कर दिया जाए तो इसमें कोई बुराई नहीं है।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: