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पीएचडी फटाफट रिकॉर्ड नदारद

इंदौर. नैक के दल ने दौरे के तीसरे व अंतिम दिन देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक कार्यालय का निरीक्षण किया। वहां पता लगा कि तीन महीने में ही पीएचडी अवार्ड हो जाती है तो रिकॉर्ड मांगा, जो नहीं बताया जा सका। कर्मचारियों ने दल के सामने यूनिवर्सिटी के खिलाफ जमकर आक्रोश जताया।

दल बुधवार को नालंदा कैम्पस (आरएनटी मार्ग) पहुंचा और परीक्षा, गोपनीय, वित्त व स्थापना विभाग और प्रेस देखी। तक्षशिला कैम्पस में रिजल्ट प्रोसेसिंग सेंटर व स्कूल ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्सका दौरा भी किया। शुरुआत में रजिस्ट्रार आर.डी. मूसलगांवकर के कक्ष में सब रजिस्ट्रार और विभाग प्रमुखों ने जानकारी दी। दल ने वित्तीय नियंत्रक और परीक्षा नियंत्रक नहीं होने की बात उठाई तो बताया मामला राज्य सरकार के पास विचाराधीन है। यूनिवर्सिटी में योजना बनाने से लेकर क्रियान्वयन के तरीके की जानकारी भी ली। फिर बारी आई परीक्षा विभाग की।

गोपनीय विभाग के दौरे में पीएचडी की जानकारी ली तो सब रजिस्ट्रार प्रज्जवल खरे ने बताया तीन महीने में भी अवार्ड कर देते हैं। सदस्य बोले हमारे यहां तो दो साल तक लग जाते हैं। यहां कैसे होता है, रिकॉर्ड बताएं। अधिकारियों ने शाम तक ढूंढ़कर दिखाने को कहा लेकिन दिखा नहीं पाए। दल ने रिसर्च के छात्रों की जानकारी ली और इसके लिए पत्रकारिता विभाग की तारीफ भी की।





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