इंदौर. मंगलवार देर रात मंदसौर के जंगलों से लाए गए तेंदुए को काबू में लाने में बुधवार की सुबह चिड़ियाघर प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों को काफी मशक्कत करना पड़ी। करीब पांच घंटे तक तेंदुआ मनमानी करता रहा। कभी पिंजरे की छड़ पर सिर ठोकता तो कभी तेजी से दहाड़ता। आखिरकार ट्रेक्यूलाइजर गन के उपयोग के बाद वह काबू में आया और इलाज शुरू हो पाया।
अब चिड़ियाघर प्रशासन ने उसे स्थायी रुप से यहीं रखे जाने के लिए शासन से गुहार लगाई है। वहीं वन विभाग के अधिकारी अब भी तेंदुए को दोबारा जंगल में छोड़ने के पक्ष में है। फिलहाल तीन दिन तक उसे चिड़ियाघर में ही रखा जाएगा और महू वेटनरी कॉलेज के डॉक्टर्स इलाज करेंगे। चिड़ियाघर प्रशासन ने उसका नाम ‘परशुराम’ रखा है।
इलाज के बाद सुधरी हालत
चिड़ियाघर के प्रभारी अधिकारी ए.के. पुराणिक बताते हैं कर्मचारियों और अधिकारियों ने सुबह से दोपहर तक प्रयास कर तेंदुए को काबू किया और इलाज के बाद उसकी हालत ठीक है। उसके सिर और पंजे से खून बह रहा था जो इलाज के बाद बंद हो गया है। उसे शाम तक खाना भी दिया जाएगा। उन्होंने बताया तेंदुए को चिड़ियाघर में ही रखने को लेकर महापौर डॉ. उमाशशि शर्मा और प्रभारी सपना चौहान ने शासन व वन विभाग से बात कर ली है और कल तक इसकी अनुमति मिलने की संभावना है।
सामंजस्य की कमी दिखी
मंगलवार की रात जब चिड़ियाघर में तेंदुए को लाया गया चिड़ियाघर का कोई जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी वहां मौजूद नहीं था। अगले दिन सुबह भी वन विभाग के अधिकारियों ने इलाज के बाद तेंदुए कों दोबारा मंदसौर के जंगलों में छोड़ने की बात कही। इस पर चिड़ियाघर प्रशासन से उनका विवाद भी हुआ। आखिरकार महापौर ने बीच में हस्तक्षेप कर वन विभाग के अधिकारियों से कह दिया कि मैं शासन से बात कर लूंगी, तेंदुए को यहीं रखा जाएगा।