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फिट नहीं थी टीम की 11 खिलाड़ी

जालंधरभारतीय हॉकी फैडरेशन के बाद उंगलियां भारतीय महिला हॉकी फैडरेशन पर भी उठने लगी हैं। भारतीय महिला हॉकी टीम के कजान में ओलंपिक क्वालीफाइंग में बुरी तरह हार गई जिसके बाद खेल मंत्रालय ने टीम के चयन पर जांच करने के आदेश जारी कर दिए हैं। रूपा सैनी ने 25 अप्रैल को ही कजान से भारतीय खेल मंत्रालय को बताया कि भारतीय टीम पूरी तरह अनफिट है और वापिस आ कर उन्होंने लिखित रिपोर्ट में भी लिखा कि 18 खिलाड़ियों में से 11 खिलाड़ी पूरी तरह अनफिट थी। इन में से तीन चार खिलाड़ी मैदान में उतरने की हालत में भी नहीं थी।

भारतीय महिला हॉकी टीम 19 से 27 अप्रैल तक रूस के शहर कजान में ओलंपिक क्वालीफाइंग मुकाबला खेलने गई और भारत सरकार की ओर से अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रूपा सैनी को टीम के साथ ऑबजरवर को तौर पर भेजा गया। इस मुकाबले में भारतीय टीम सिर्फ रू स और फ्रांस की टीमों को हरा सकी और ओलंपिक के लिए क्वालीफाई न कर सकी।

टीम के चयन में कोच की कोई दखलअंदाजी नहीं

भारतीय महिला टीम का मु?य कोच किशन कौशिक ने ब्यान दिया था कि ठंड की वजह से भारतीय टीम अच्छा नहीं खेल रही, लेकिन बाद में उसने साफ तौर पर कह दिया कि अनफिट टीम के साथ ओलंपिक में स्थान नहीं पाया जा सकता। कौशिक का कहना है सबा अंजुम नाम की खिलाड़ी बुरी तरह से चोटिल भी थी तब भी उसे टीम में भेजा गया। भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान 36 वर्षीय प्रीतम को भी अनफिट होते हुए टीम में जगह दी गई। इस टीम के चयन में कोच की कोई सलाह नहीं ली गई।

प्रधान और सचिव में मतभेद

भारतीय महिला हॉकी फैडरेशन के प्रधान विद्या स्टोक्स और सचिव अमृत बोस को बीच पिछले दो सालों से मतभेद चले आ रहे हैं। इन दोनों ने पिछले काफी समय से एक दूसरे से बात तक नहीं की। भारतीय महिला हॉकी फैडरेशन की प्रधान किसी भी राष्ट्रीय चैंपियनशिप में नहीं गई और जालंधर में फरवरी में हुई सीनियर राष्ट्रीय महिला हॉकी चैंपियनशिप में न तो प्रधान ही आई और न ही सचिव ने आना उचित समझा। इसी मतभेद के चलते फैडरेशन के नवंबर 2007 में होने वाले चुनाव आज तक नहीं करवाए गए।





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