इंदौर.
नीम सिटी ग्रीन सिटी प्रोजेक्ट के तहत इंदौर नगर निगम ने 14 घंटे 15 मिनट में 101 गार्डन का भूमिपूजन कर रिकॉर्ड कायम कर लिया है। अभियान की सफलता पर नेहरू पार्क में आयोजित समारोह में 20 हजार से अधिक नागरिकों ने पर्यावरण चेतना की ज्योत जलाकर पर्यावरण रक्षा का संकल्प भी लिया।
घड़ी के कांटों ने जैसे ही शाम 7 बजकर 27 मिनट का समय दिखाया, पार्क में मौजूद बच्चे, बूढ़े, महिला व पुरुषों ने मोमबत्ती जलाकर हजारों प्रकाश बिंदुओं से वातावरण को दैदीप्यमान कर दिया। पर्यावरण चेतना के गीत के बीच भारत माता और वंदे मातरम के जयकारे लगते रहे। इस अवसर पर महापौर डॉ. उमाशशि शर्मा ने कहा जो दिन मैंने आज देखा है उसकी कल्पना सपने में भी नहीं की थी।
चाहे रात दो बजे हों या दोपहर के दो बजे, भूमिपूजन के लिए मैं जिस कॉलोनी में गई, लोगों ने पूरा सहयोग किया। आज स्पष्ट हो गया है कि शहर का हर व्यक्ति विकास की राह पर चलना चाहता है। मुख्य अतिथि पूर्व सांसद कृष्णमुरारी मोघे ने कहा नगर निगम की पहल में नागरिकों ने जिस तरह का सहयोग दिया है वह उनके पर्यावरण प्रेम को दर्शाता है। इस मौके पर नगर अध्यक्ष सुदर्शन गुप्ता, विधायक उषा ठाकुर, महेंद्र हार्डिया, संभागायुक्त बी.पी.सिंह, आई.जी., निगमायुक्त नीरज मंडलोई, समाजसेवी बाबूलाल पाटौदी, एमआईसी सदस्य, पाषर्द, अधिकारी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
..तो दर्ज हो जाएगा लिम्का वर्ल्ड रिकॉर्ड में शहर का नाम
लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के एसोसिएट एडिटर एम.के.जोस ने चर्चा में कहा कि मैं पूरे आयोजन में साथ रहा। मात्र 14 घंटे, 15 मिनट में 101 गार्डन के भूमिपूजन का रिकॉर्ड निश्चित ही बुक में दर्ज हो जाएगा। यह अपनी तरह का अनोखा आयोजन है। आयोजन में शामिल करीब 25 हजार लोगों ने इसकी पुष्टि की है। बुक में रिकॉर्ड दर्ज होने के सवाल पर उन्होंने कहा 15 अगस्त 2008 तक यदि कोई चुनौती हमारे सामने नहीं आती है तो 2009 के लिए प्रकाशित होने वाली बुक में यह रिकॉर्ड इंदौर के नाम होगा।
नेहरू पार्क में लगा मेला : नगर निगम द्वारा पार्क में मेले का आयोजन भी किया गया था। झूला, चकरी और ट्रेन में घूमने का निशुल्क आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में शहरवासी यहां पहुंचे थे। महिलाओं और बच्चों की संख्या इसमें सर्वाधिक थी। कार्यक्रम के अंत में लकी ड्रॉ निकालकर दस लोगों को पुरस्कार भी दिए गए। कार्यक्रम में गायिका सारिकासिंह व आकांक्षा जाचक ने गीतों की प्रस्तुति दी वहीं लोकमान्य तिलक सांस्कृतिक न्यास के बच्चों ने मलखंभ सहित अन्य विधाओं की प्रस्तुति दी।
झलकियां
अभियान 12.02 बजे महापौर निवास के सामने स्थित बगीचे से शुरू होना था लेकिन शुरू हुआ 11.57 बजे।
महापौर निवास के सामने सड़क से लगी जमीन पर बगीचे की बुनियाद रखी गई। शिलालेख पर सांसद और महापौर के साथ क्षेत्रीय विधायक व लोक निर्माण मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का नाम तो था लेकिन मंत्रीजी गायब थे।
अभियान की सूची में दूसरा दिलपसंद कॉलोनी का वह गार्डन था जो नगर निगम पहले ही बना चुका है। महापौर ने जब शिलान्यास किया तो लोग समझे लोकार्पण हुआ है।
12.05 बजे राजकुमार ब्रिज के नीचे स्थित मंदिर और बोगदे तथा 12.20 बजे बाणगंगा मुक्तिधाम में जब बगीचों का शिलान्यास हुआ तो लोग हंसी नहीं रोक पाए। उनका कहना था यहां आएगा कौन?
आधी रात को जब लाल-पीली बत्तियों की कार वाला काफिला बाणगंगा क्षेत्र स्थित जयहिंद नगर पानी की टंकी, लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन, यादव नंदनगर, ऋषिनगर, प्रिंस कॉलोनी, स्कीम-51 और संगमनगर की तंग गलियों से गुजरा तो लोगों की नींद उड़ गई। जिन्हें अभियान की जानकारी नहीं थी वे जैसे ही कोई कार रुकती, ड्राइवर से पूछते क्या कोई बड़ा कांड हो गया?
महापौर पति डॉ. संतोष शर्मा की कार काफिले में सबसे आगे थी। वे काफिले का मार्गदर्शन तो कर ही रहे थे साथ में जल्दी पहुंचकर रहवासियों को इकट्ठा भी कर रहे थे।
ज्यादातर बगीचों में माली सजी-धजी थालियां लेकर महापौर के आने का इंतजार करते रहे।
157 संगमनगर के सामने स्थित बगीचे में पहुंचते ही प्यासे अफसर पानी को लेकर परेशान हुए। प्रभारी को फटकार लगाई तो दो मिनट में पानी मौके पर पहुंच गया।
महूनाका स्थित श्रीरामनगर का नाम सूची में नहीं था, इसे ऐन वक्त पर जोड़ा गया।
शिलान्यास के बीच जमीनी कारोबार से जुड़े कुछ लोग यह भी चर्चा करते रहे कि गार्डन डेवलप होने से प्लॉट के भाव 300 रुपए वर्गफीट बढ़ जाएंगे। इस पर पास ही खड़े निगम अधिकारी ने भी कह दिया संपत्तिकर भी इन क्षेत्रों का बढ़ाना होगा।
गायत्रीनगर में शिलान्यास के समय गायत्री परिवार के सदस्यों ने अपनी पद्धति से ही शिलान्यास करवाया।
शिलान्यास पट्टिका को लेकर भी चर्चाएं होती रहीं। पूरे अभियान में महापौर के अलावा सांसद का नाम सभी जगह था, बाकी नामों में जनकार्य प्रभारी, स्थानीय पाषर्द या जोन अध्यक्ष का नाम था।
रहवासी संघों को निर्धारित समय दिया गया था पर अभियान आधे घंटे पहले चल रहा था। इससे सदस्य भी कई जगह महापौर व टीम के आने के बाद पहुंचे।
भूमिपूजन के लिए अमले ने गैती व कुदाली भी अपने साथ ही रखी। फिर भी कई जगह रहवासियों को ऐनवक्त पर व्यवस्था करना पड़ी।
भूमिपूजन के बीच चर्चा यह भी रही कि महापौर ने अपने ही जन्मदिन को यादगार दिन के रूप में मनाया।
चार-पांच बगीचों को छोड़कर शिलालेखों पर कई बगीचों में परदे नहीं लगे थे। कुछ अधिकारियों ने जब इस बारे में पूछताछ की तो पता चला नगर निगम ने परदे के पैसे नहीं दिए हैं।
शिवशक्तिनगर के बगीचे का शिलालेख महापौर के आने के करीब दो घंटे पहले ही लगा था। यहां किसी जमीन मालिक का बगीचे को लेकर विवाद चल रहा था। इसे निपटाकर शिलालेख लगाया जा सका।
महापौर जब वंदनानगर के बगीचे पहुंची तो वहां शादी चल रही थी। एकाएक इतनी भीड़ देखकर कुछ मेहमानों को लगा शादी में कोई वीआईपी आया है।