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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. नक्सलियों के शहरी नेटवर्क का हिस्सा रहे आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने राजद्रोह का मामला दर्ज किया है। इलेवंथ एडीजे बीएस सलूजा की कोर्ट में बुधवार से मुकदमे पर बयानों का सिलसिला शुरू हुआ।
नक्सली नेता नारायण सान्याल, पीयूसीएल के महासचिव विनायक सेन और नक्सलियों के डाकिए पीयूष गुहा को बुधवार को कोर्ट में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अदालत में पेश किया गया। दोपहर 1.30 बजे ट्रायल के पहले गवाह के रूप में अनिल सिंह को अदालत में पेश किया गया। उसकी गवाही तीन घंटे चली। गवाह ने अदालत को बताया कि उसने 6 मई 2007 को सम्राट टाकिज के पास पुलिस को पीयूष गुहा को पकड़ते हुए देखा। वह उस रास्ते से गुजर रहा था। वह खुद फेरीवाला है और घूम-घूमकर कपड़े बेचता है।
पीयूष के पास से पुलिस ने तीन माओवादी पत्रिकाएं, नारायण सान्याल का अंग्रेजी में लिखे दो पत्र, बांगला में लिखा एक पत्र और मोबाइल सेट समेत 49000 रुपए जब्त किए थे। सामान की जब्ती कर पुलिस ने गवाह के तौर पर अनिल के दस्तखत लिए थ। सरकारी वकील टीसी पंडया ने कोर्ट के सामने जब्तशुदा सामान की सीलबंद पेटी खुलवाई। गवाह ने पेटी में बंद सभी सामान की शिनाख्त की। गौरतलब है कि पुलिस की पूछताछ में यह बात भी सामने आई थी कि पीयूष इन पत्रों को कोलकाता ले जाने वाला था। कोलकाता में इन पत्रों को विनायक सेन के बताए गए किसी ठिकाने में भी देने वाला था।
गवाह से विनायक सेन की तरफ से पटना हाईकोर्ट की वकील अंजना प्रकाश, बिलासपुर हाईकोर्ट से महेंद्र दुबे व रायपुर सेशन कोर्ट से एसके फरहान ने क्रास एक्जामिन किया। डिफेंस लायर का कहना था कि गवाह पीयूश के पकड़े जाने के समय वहां पर नहीं था। उन्हें पुलिस ने बाद में गवाह बनाया है। समान बरामदगी के बाद गवाह के सिर्फ दस्तखत भर है। उस जगह पर न तो कोई तारीख ही दर्ज है और न ही समय। दूसरी बात गवाह ने अपने बयान में कहा कि आन द स्पाट पंचनामा किया गया जबकि पुलिस ने थाने में जाकर पंचनामा किया।
राजकुमार की गवाही आज
गुरुवार को महेंद्रा होटल के कर्मचारी राजकुमार नामदेव की गवाही होगी। गिरफ्तारी के पहले पीयूष गुहा महेंद्रा होटल में ही ठहरा था। केस का ट्रायल 3 मई तक चलेगा। गवाह को यह भी ठीक से नहीं पता है कि उस वक्त स्पाट पर कितने पुलिस वाले मौजूद थे।
तलाशी में निकला चाकूनुमा हथियार
राजद्रोह का मुकदमा होने के कारण पुलिस ने इलेवंथ एडीजे कोर्ट के सामने लगभग छावनी तैयार कर रखी थी। कोर्ट परिसर के आसपास हर आने जाने वाले की तलाशी ली गई। इसी दौरान मेटल डिटेक्टर की बीप की आवाज से भिलाई निवासी पीयूसीएल के स्टेट एक्जीक्यूटिव मेंबर अजय टीजे के बैग से चाकूनुमा हथियार बरामद हुआ।
इस बात की जानकारी सीएसपी बीबीएस राजपूत ने तुरंत जज बीएस सलूजा को दी। इसके बाद जज ने केस की सुनवाई के पहले कोर्ट में उपस्थित विनायक सेन के सभी समर्थकों की तलाशी के आदेश दिए। पुलिस की सख्त पहरेदारी के लिए टीआई मुकेश खरे व आरके दुबे व महिला आरक्षकों को एसपी अमित कुमार ने नगद ईनाम देने की घोषणा भी कर दी। पुलिस ने बताया शहर में नक्सली समर्थक केएस प्रिया व हार्डकोर नक्सली मीना चौधरी की गिरफ्तारी के बाद अजय के भिलाई स्थित निवास से कंप्यूटर भी सीज किया गया था।