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रामेश्वरपुर में मिला परशुराम का धनुष!

अंबिकापुर. प्रेमनगर क्षेत्र में रामेश्वरपुर के जंगल में शोधकर्ताओं ने अद्भुत धनुष की खोज की है, जिसे रामायण काल से जोड़कर देखा जा रहा है। पुरातात्विक महत्व के इस धनुष पर शोध से गौरवशाली अतीत पर रोशनी पड़ सकती है। कई प्रमाण इसके परशुराम का धनुष होने का संकेत देते हैं।

इस धनुष की खोज शोधकर्ता शरद दुबे, ग्रामीण बैंक के अधिकारी अवध बिहारी द्विवेदी, हेमंत सिन्हा, अखिलेश पांडेय ने की। श्री दुबे ने बताया कि यह धनुष रामेश्वरपुर के पास एक पर्वत के शिखर पर बने एक मंदिरनुमा कमरे में मिला। क्षेत्र के बुजुर्गो ने बताया कि 1960 के दौरान क्षेत्र के एक संपन्न आदमी को यह धनुष जंगलों में मिला था, जिसे उन्होंने पर्वत पर एक कमरा बनवाकर रखवा दिया। सरगुजा में बिखरे अनसुलझे पुरावशेष इस बात के साक्षी हैं कि प्राचीन समय में यह क्षेत्र विकसित राज्य था।

देवता वास करते थे : डीपाडीह, महेशपुर, रामगढ़, देवगढ़, सतमहला, हर्राटिकरा, शंकरगढ़, बेलसर, ओकरा-राजपुर क्षेत्रों के घनघोर वनों व विशाल पर्वत शिखरों पर मिलने वाले भग्नावशेष इसके प्रमाण हैं। देवगढ़ में तो देवताओं के वास करने के कई साक्ष्य मौजूद हैं। महामुनि परशुराम के पिता की तपोभूमि भी यही स्थान रहा है, उनकी माता रेणुका आज भी इसी क्षेत्र में नदी के रूप में प्रवाहित हो रही हैं। रेणुका के पिता मतंग ऋषि के कारण उनकी तपोस्थली को मतरेंगा पर्वत के नाम से जाना जाता है, जो यहां का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मैनपाट है।

टांगीनाथ में रहते थे परशुराम : श्री दुबे ने बताया कि यह क्षेत्र परशुराम से भी संबंधित रहा है। माना जाता है कि परशुराम सरगुजा के कुसमी नामक स्थान के पास टांगीनाथ में आश्रम बनाकर रहते थे। वहीं सहस्रबाहु उसी काल में बिलासपुर के पास रतनपुर (रत्नपुर) में राज्य करते थे, जिनका बाद में परशुराम ने संहार किया।

महेशगिरी यानी महेंद्रगिरी

जिस पर्वत शिखर पर धनुष रखा हुआ है, वह बांगो बांध के डुबान क्षेत्र में है। बारिश में पानी भर जाने से यह हिस्सा टापू में तब्दील हो जाता है और यहां तक पहुंच पाना मुश्किल हो जाता है। पुराणों में उल्लेख है कि परशुराम का आश्रम व निवास महेंद्रगिरी पर था। यह धनुष भी जिस पर्वत पर है वह महेश पहाड़ अर्थात महेंद्रगिरी ही है। कई प्रकार की समानताएं निश्चित रूप से किसी एक दिशा की ओर इंगित कर रही हैं। इस दुर्लभ धनुष के अध्ययन व शोध से इस क्षेत्र से संबंधित कई किवदंतियां प्रमाणित हो सकेंगी।





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