नई दिल्लीएक प्रोजेक्ट डायरेक्टर इंडिगो में घूम रहा है, जबकि उसे इसका हक नहीं है। एसी के लिए इनवर्टर है, लेकिन दोनों को आपस में जोड़ने की किसे फुर्सत है। जिला स्तर के ऑफिसों में महंगी फोटो कॉपी व फैक्स मशीनें लगवा रखी है, जबकि बिजली है ही नहीं।यह तस्वीर है उस सर्वशिक्षा अभियान औैर मिड डे मील योजना की, जिसे केंद्र सरकार अपनी सबसे सफल योजनाएं बताती हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति ने विभिन्न राज्यों का दौरा कर इन योजनाओं की वास्तविकता उजागर की है। समिति को इन दो योजनाओं के अलावा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना के अमल का जायजा लेने को कहा गया था।
यूपी, बिहार सबसे खराब :
समिति ने बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, महाराष्ट्र, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश का दौरा किया। समिति ने योजनाओं पर अमल को लेकर महाराष्ट्र और कर्नाटक को सबसे अच्छा और उत्तरप्रदेश और बिहार को सबसे खराब बताया है।
सुविधा के हकदार नहीं :
पैनल के सदस्य हिसाम सिद्धिकी के मुताबिक, ‘सर्वशिक्षा अभियान की राशि से अफसरों ने अपने ऑफिस में एसी लगवा लिए हैं। झारखंड में स्टेट प्रोजेक्ट के एक ऑफिसर के पास इंडिगो कार है, जबकि इसके लिए मुख्य सचिव की रैंक के अधिकारी पात्र होते हैं।’
स्कूलों में गलत आंकड़े
समिति के मुताबिक लगभग सभी राज्यों के स्कूलों में बच्चों की संख्या में घोर विसंगति है। स्कूलों में ज्यादा नामांकन दिखाए गए हैं और बीच में पढ़ाई छोड़ देने वाले बच्चों की संख्या कम बताई गई है। समिति के ही प्रोफेसर मोहम्मद हलिम के मुताबिक, ‘बिहार में 50 से 60 फीसदी बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं, लेकिन सरकार इसे 10 से 12 फीसदी ही बताती है।
यह है योजनाओं की वास्तविकता >> सर्वशिक्षा अभियान के कापरेरेट ऑफिसों जैसे आलिशान दफ्तर। >> लगभग सभी राज्यों में अधिकारियों के पास शेवरलेट व इंडिगो जैसी कारें। >> उत्तरप्रदेश व बिहार में मिड डे मील योजना में दिए खराब चावल से बच्चों की तबियत खराब हो गई। अच्छा चावल खुले बाजार में बेच दिया गया।
>> बिहार के मुंगेर व किशनगंज जिलों में गत सात माह से बच्चों को दोपहर का भोजन नहीं दिया जा रहा है। >> असम के दारंग जिले के दफ्तर में एसी है और उसके लिए इनवर्टर भी, लेकिन अधिकारियों को उन्हें आपस में जोड़ने की परवाह नहीं है। लिहाजा दोनों धूल खा रहे हैं।
पिछले कुछ वर्षो में मिली सफलता वैसे मानव संसाधन विकास मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने इस बात पर तसल्ली जताई है कि पिछले कुछ वर्षो में सर्वशिक्षा अभियान को सफलता मिली है। ग्लोबल मॉनिटरिंग रिपोर्ट 2008 में भारत में शिक्षा की स्थिति को बेहतर बताया गया है। शिक्षा विकास सूचकांक 0.789 के मुकाबले 0.797 हो गया है। समिति ने भी महाराष्ट्र और कर्नाटक में स्थिति को संतोषजनक पाया है।