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बोड़सरा के आरोपी की मौत, हंगामा

बिलासपुर. b बोड़सरा कांड के एक आरोपी की सेंट्रल जेल में मौत के बाद बुधवार को सतनामी समाज के लोगों ने जेल परिसर और सिम्स में जमकर हंगामा मचाया। लाश लेकर उन्होंने 6 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन एसडीएम को सौंपा और मांगें पूरी नहीं होने तक अंतिम संस्कार न करने की चेतावनी दी है। प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसकी मौत हार्टअटैक से होने की पुष्टि हुई है।

बोड़सरा बाड़ा में अनाधिकृत प्रवेश व शांति भंग के आरोप में पुलिस ने तारबाहर गुरु घासीदास मंदिर के पीछे रहने वाले 66 वर्षीय रामाधीन महिलांगे को केंद्रीय जेल में बंद रखा गया था। आज सुबह 6 बजे जब जेल कर्मचारी बैरक खोलने पहुंचे तो उन्होंने रामाधीन को बेहोशी की हालत में देखा।

तत्काल उसे जेल हास्पिटल लाया गया और अधीक्षक राजेंद्र गायकवाड़ को मामले की सूचना दी गई। जांच के दौरान ही 10 मिनट बाद उसकी मौत हो गई। इसकी सूचना जब उसके परिजनों को मिली तो वे समाज के अन्य लोगों को साथ लेकर जेल पहुंचे और पुलिस व प्रशासन पर आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे।

रामाधीन के बेटे राजकुमार का कहना था कि कल सुबह वे मिलने आए थे तो उसके पिता ठीक थे। इलाज के अभाव में ही उसकी मौत हुई है। यह बात जब कांग्रेस समर्थकों को पता चली तो वे भी पहुंच गए और उन्होंने भी प्रशासन पर आरोप लगाने शुरू किए। पोस्टमार्टम के लिए जब लाश को सिम्स पहुंचाया गया तो यहां भी जमकर हो-हल्ला हुआ। समाज के लोग मृतक के परिजन को 11 लाख रुपए मुआवजा व सतनामी डाक्टर द्वारा पोस्टमार्टम कराने की मांग कर रहे थे।

यहां तहसीलदार एमएल गायकवाड़ पहुंचे थे। सतनामी डाक्टर की अनुपस्थिति में 6 डाक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम के बाद जब लाश सेंट्रल जेल लाई गई तो फिर हंगामे की स्थिति निर्मित हो गई। इसके चलते जेल में पुलिस बल बुलाना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम के बाद कांग्रेस समर्थक व समाज के लोग लाश लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे और 6 सूत्रीय मांगों के संबंध में एसडीएम संजय अग्रवाल को ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में मृत्यु की उच्च स्तरीय जांच व आरोपियों की सजा, मृतक के परिजन को 11 लाख रुपए मुआवजा, बोड़सरा कांड के सभी आरोपियों की रिहाई और इलाज, आहत व्यक्तियों की चोट की तीन सदस्यीय डाक्टरों की टीम से मुलाहिजा, अंतिम संस्कार के लिए गुरु बालकदास व अन्य आरोपियों को छोड़ने की मांग की गई है।

प्रारंभिक जांच में नहीं मिले चोट के निशान

पोस्टमार्टम में रामाधीन के शरीर के बाहरी हिस्से में किसी तरह की चोट का निशान नहीं पाया गया है। समाज के लोगों की मांग पर 6 डाक्टरों की टीम में एक सतनामी समाज के डाक्टर को भी शामिल किया गया था। पोस्टमार्टम करने के बाद दी गई प्रारंभिक रिपोर्ट में डाक्टरों ने मौत का कारण कार्डियक फेलुअर को बताया है। उसकी उम्र 60 वर्ष से अधिक थी। डाक्टरों के मुताबिक मौत 12 घंटे के भीतर हुई है।

उच्चस्तरीय जांच हो: जोगी

बोड़सरा प्रकरण में जेल में बंद कैदी रामाधीन महिलांगे की मौत के बाद मामले में राजनीति गरमाने लगी है। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने कहा है कि प्रारंभिक तौर पर मिल रही जानकारी के अनुसार जेल में प्रताड़ित किए जाने की वजह से मौत हुई है। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और प्रदेश की जेल में कैदियों को दी जा रही प्रताड़ना बंद करने की मांग की।

पत्रकारों से चर्चा करते हुए श्री जोगी ने कहा कि उन्होंने कलेक्टर से बात करके मामले की जांच और मृतक के परिवार को उचित मुआवजा देने को कहा है। साथ ही मृत्यु के कारणों का पता लगाकर कार्रवाई करने की भी जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जेलों में कैदियों का इलाज और उचित देखभाल नहीं हो रही है। जेल के अंदर उत्पीड़न चिंता का विषय है।

यह तुरंत बंद होना चाहिए। हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है। इस मौत से भी पूरे छत्तीसगढ़ में प्रतिक्रिया होगी। उन्होंने फिर दोहराया कि बोड़सरा मामले का स्थाई हल जरूरी है। वाजपेयी परिवार के साथ बातचीत के बाद उन्हें मुआवजा देकर बाड़ा लिया जाए और उसका कायाकल्प कर इसे सतनामी समाज को सौंपा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल में भी उन्होंने मामले के निराकरण की कोशिश शुरू की थी, जो सरकार बदलने से अधूरी रह गई। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पीसीसी राहुल गांधी के दौरे के बाद गांवों को गोद लेकर विकास करने का अच्छा काम कर रही है। उसमें हरेक कांग्रेसी सहयोग करेगा।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों में घूमे और सीधे आम जनता के बीच बैठकर उनसे बात की। इससे वे सच्चई से रूबरू हुए। लोग इससे काफी प्रभावित हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि आमतौर पर किसी नेता के आने-जाने पर कोई टिप्पणी नहीं होती, लेकिन राहुल गांधी के दौरे पर भाजपा के बड़े नेता जिस तरह के बयान दे रहे हैं, उससे पता चलता है कि वे भयभीत और विचलित हैं।

उन्होंने कहा कि भाजपा नेता कांग्रेस में गुटबाजी और लड़ाई का दुष्प्रचार कर चुनाव जीतने की फिराक में हैं, जबकि भाजपा में राष्ट्रीय स्तर से प्रदेश तक लड़ाई और गुटबाजी है। राष्ट्रीय स्तर पर लालकृष्ण आडवानी, राजनाथ, नरेंद्र मोदी नेतृत्व को लेकर लड़ रहे हैं। उमाभारती, कल्याण सिंह, मदनलाल खुराना प्रकरण भाजपा की अंदरूनी कलह के उदाहरण हैं।

लड़ाई सिर्फ टिकट पाने तक

श्री जोगी ने कहा कि कांग्रेस में सिर्फ टिकट पाने तक लड़ाई होती है। इसके बाद जिसे भी टिकट मिले, सभी लोग मिलजुलकर चुनाव लड़ते हैं। भाजपा नेता अगर दुष्प्रचार के सहारे चुनाव लड़ने की सोच रहे हैं, तो वे मुगालते में हैं। प्रभारी मंत्री हेमचंद मंत्री के इस बयान कि जोगी सीएम के खिलाफ कभी नहीं जीत पाएंगे, उन्होंने कहा कि मैंने हमेशा चुनौतियों का सामना करके ही चुनाव लड़ा है। रायगढ़, मरवाही, महासमुंद इसका उदाहरण है। प्रदेश की जनता पर मुझे पूरा भरोसा है।





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