मुंबई.आज महाराष्ट्र स्थापना दिवस है। आज ही के दिन ठीक 48 वर्ष पहले महाराष्ट्र की स्थापना हुई थी। महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर सायली परांजपे के साथ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री विलास राव देशमुख से हुई बातचीत के प्रमुश अंश:
महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर आप राज्य की जनता को क्या संदेश देना चाहते हैं?
मैं आज के दिन दुनिया भर में फैले मराठी समुदाय से सिर्फ एक निवेदन करना चाहता हूं कि वे राज्य के विकास में हमें सहयोग दें।
पिछले 48 सालों में महाराष्ट्र के विकास में सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव क्या है और भविष्य में राज्य के विकास के लिए आपकी सरकार की क्या योजनाएं हैं?
महाराष्ष्ट्र का इतिहात गैरवशाली है। महाराष्ट्र विकास और उन्नति के मामले में देश के अन्य राज्यों में अग्रणी है। ऐसे राज्य का नागरिक और मुख्यमंत्री होना मेरे लिए गर्व की बात है। वतर्मान में ही नहीं बल्कि ब्रिटीश काल से ही देश के स्वतंत्रता सग्राम में मराठी नागरिकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी । समाज सुधार में भी महाराष्ट्र काफी आगे रहा है। वर्तमान परिपेक्ष में भी महाराष्ट्र सरकार ने रोजगार और गरीवी मिटाने के लिए भी कई महतेवपूर्ण कदम उठाए हैं।
1977 में महाराष्ट्र सरकार की रोजगार गारंटी योजना ग्रामीणों के विकास में मील का पत्थर साबित हुई और महाराष्ट्र सरकार से प्रेरणा लेते हुए 2005 में क्रेन्द्र सरकार ने इस योजना को पूरे देश में लागू किया। मैं इस बात से इंकार नहीं कर रहा हूं कि आज हमारे राज्य में बिजली की भारी कमी है और इससे आम जनता को काफी मुश्कियों का सामना करना पड़ रहा है लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि कुछ सालों के भीतर ही महाराष्ट्र सरकार बिजली संकट को भी खत्म करने में कामयाब रहेगी।
संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के बारे में आज की युवा पीढ़ी को कितनी जानकारी है?जागरुकता फैलाने के लिए राज्य सरकार क्या प्रयास कर रही है?
संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन देश के सबसे बड़े आंदोलनों में से एक है लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि इस आंदोलन से जुड़े ज्यादातर आंदोलनकर्ता या तो काफी बूढ़े हो गए है या फिर चल बसे है। ऐसे में इस आंदोलन के महत्व का ज्ञान आम लोगों तक पहुंचाना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। हमारी सरकार संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के बारे में विशेष तौर पर युवापीढ़ी को जागरुक करने के लिए इसे स्कूल के पाठयक्रम में शामिल करने के अलावा समय-समय पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनी और डाक्यूमेट्री फिल्म का आयोजन करती है।
महाराष्ट्र दिवस को मराठी अस्मिता से जोड़ा जा रहा है इस बारे में आपका क्या विचार है?
महाराष्ट्र दिवस को मराठी अस्मिता के साथ जोड़ना गलत है। महाराष्ट्र का इतिहास अतिथिदेवो भव: का रहा है। हम महाराष्ट्र को सिर्फ मराठियों के साथ जोड़ देश कीएकता को प्रशनचिन्ह नहीं लगा सकते। महाराष्ट्र की संस्कृति सभी समुदाय को साथ में लेकर चलने में विश्वास करती है और हम इस परंपरा को आगे बढ़ाना चाहते हैं।