जयपुर. राष्ट्रीय बागवानी मिशन में हुए करोड़ों रुपए के कीटनाशक घोटाले की जांच अब आर्थिक नीति एवं सुधार परिषद के उपाध्यक्ष हरिशंकर भाभड़ा करेंगे। उधर घोटाला उजागर करने वाले आईएएस अधिकारी आर.एस. गठाला पर लगे आचरण नियमों के उल्लंघन की जांच अतिरिक्त मुख्य सचिव (विकास) ए.के. पांडे को दी गई है।
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बागवानी घोटाले में कृषिमंत्री प्रभुलाल सैनी के पत्र को आधार बनाते हुए यह फैसला किया। इससे पहले कुछ जाट नेताओं ने गठाला को एपीओ करने पर नाराजगी जताई थी। गठाला ने पिछले दिनों राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत मंत्री के चहेतों को करोड़ों का फर्जी अनुदान देने का आरोप लगाया था।
मंत्री की भूमिका की भी जांच होगी : सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि भाभड़ा को पूरे प्रकरण की ही जांच सौंपी गई है। वे गठाला की ओर से लगाए गए आरोपों और इसमें कृषिमंत्री प्रभुलाल सैनी की भूमिका की जांच करेंगे। इस में कौन-कौन सी कंपनियां और कौन लोग शामिल हैं, उनका कृषिमंत्री से क्या संबंध है, क्या कृषिमंत्री फर्जी अनुदान उठाने वालों को बचा रहे हैं। इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत जांच की जाएगी।
पांडे को देनी होगी 15 दिन में रिपोर्ट : सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि कृषिमंत्री की ओर से गठाला पर लगाए गए आचरण नियमों के उल्लंघन के आरोपों की प्राथमिक जांच रिपोर्ट अतिरिक्त मुख्य सचिव (विकास) ए.के.पांडे से 15 दिन में मांगी गई है। यदि प्रारंभिक जांच में आचरण नियमों के उल्लंघन का मामला पाया जाता है तो उसके बाद उन्हें चार्जशीट दी जाएगी।
चार्जशीट को लेकर कशमकश :
गठाला को चार्जशीट देने को लेकर सरकार में शुक्रवार को भी कशमकश चलती रही। इसके लिए विधि विशेषज्ञों से राय भी ली गई। दरअसल गठाला का प्रशासनिक विभाग अभी कार्मिक है। उद्यान सचिव रहने के समय उनका प्रशासनिक विभाग कृषि था।
कार्मिक विभाग का मानना है, चूंकि गठाला ने उद्यान सचिव के पद पर रहने के दौरान जांच की और वही मामला उजागर किया है, इसलिए कृषि विभाग से ही उन्हें चार्जशीट मिलनी चाहिए।
उधर, कृषि विभाग का मानना है कि गठाला चूंकि अभी विभागीय जांच आयुक्त हैं इसलिए कार्मिक विभाग ही उन्हें चार्जशीट दे। अंत में यह तय हुआ कि आचरण नियमों के उल्लंघन की पहले अतिरिक्त मुख्य सचिव से प्रारंभिक जांच करवा ली जाए।
इन बिंदुओं पर होगी जांच
कीटनाशक सप्लाई करने के लिए राज्य में कौन-कौन सी कंपनी अधिकृत हैं।
किसानों को कीटनाशक देने के प्रावधान क्या हैं।
कीटनाशक बांटने के लिए कौन अधिकारी सक्षम हैं और कौन वितरण करता है।
गठाला ने किन-किन योजनाओं का किसके आदेश से कब-कब निरीक्षण किया।
निरीक्षण के परिणाम क्या रहे। उन्होंने अपनी रिपोर्ट किसको सौंपी और उस पर क्या कार्रवाई हुई।
यदि उन्होंने जांच रिपोर्ट प्रमुख शासन सचिव या सरकार को नहीं दी तो उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाए।
जिन योजनाओं में घोटाले की बात कही जा रही है, उनमें कौन-कौन दोषी हैं।
क्या गठाला भी सुपरवाइजरी नेग्लीजेंसी के दोषी हैं?
भाभड़ा से जांच कराने का मतलब क्या?
पूर्व उप मुख्यमंत्री हरिशंकर भाभड़ा आसानी से किसी के दबाव में नहीं आते। चुनावी वर्ष होने की वजह से सरकार प्रभुलाल सैनी के खिलाफ भी निष्पक्ष जांच चाहती है। कांग्रेस को सरकार के खिलाफ बड़ा मुद्दा नहीं मिल जाए, इसलिए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भाभड़ा को यह प्रकरण सौंपा है। इसके पीछे मंशा यह है कि इस निष्पक्ष जांच के बहाने सैनी के बारे में भी वास्तविकता का पता लगाया जा सकेगा। वैसे भाजपा में भाभड़ा को मैनेज करना बहुत मुश्किल माना जाता है।
पहले अपना घर टटोलें : गठाला
आईएएस आरएस गठाला ने कहा है कि मेरे कामकाज की जांच करनी है तो खूब करें, लेकिन पहले अपना घर टटोल लें। सारी रिपोर्टें विभाग में हैं। मुझे अभी तक तो चार्जशीट मिली नहीं है। मिलेगी तो जवाब दे दूंगा। गलत दी तो कोर्ट भी जा सकता हूं। चार्जशीट देना कोई खास बात नहीं है, दो-तीन बार मिल चुकी है।
दुखी हूं, सौ करोड़ का मामला नहीं : सैनी
कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी ने कहा कि सौ करोड़ रुपए के घोटाले की बात बेबुनियाद है। इस योजना में दो साल में केवल ढाई करोड़ रुपए का खर्चा हुआ है। मैं और मेरा परिवार इस घटनाक्रम से काफी आहत है। मैं अब इस मामले की तह तक जाऊंगा। कलेक्टरों की जांच रिपोर्ट फरवरी-मार्च में आ चुकी है।
>> किसी में कहीं गड़बड़ी नहीं बताई गई है। इसमें गठाला भी सुपरवाइजरी नेग्लीजेंसी के लिए जिम्मेदार तो हैं ही। सपने देखने का उन्हें हक तो है, लेकिन वे पद छोड़ने के बाद ऐसा करते तो ठीक था।
प्रभुलाल सैनी, कृषि मंत्री