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जंगल थर्राने वाली ‘झालरा’ हुई लाचार

जयपुर. रणथंभौर अभयारण्य की सबसे खूबसूरत बाघिन ‘झालरा’ का एक दांत (कैनाइन) और टूट गया है। उसके दो दांत कुछ समय पहले टूट गए थे। चार में से तीन कैनाइन टूटने से अब वह शिकार के लिए मोहताज हो गई है।

रणथंभौर में बाघ-बाघिनों का करीब एक चौथाई कुनबा झालरा का ही है। जंगल वाले उसे ‘’ऐश्वर्या’ भी कहते हैं। उसे झालरा गांव से रणथंभौर अभयारण्य में शिफ्ट किया गया था, इसीलिए इसका नाम झालरा रखा गया। झालरा की जिंदगी अब संध्याकाल में है। वह करीब तेरह-चौदह साल की है।

मांसाहारी जानवरों के चार मुख्य दांत होते हैं। इनके लंबे व पैने नुकीले कील जैसे दांत (कैनाइन) शिकार को चीरने-फाड़ने में मदद करते हैं। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक आर.एन.मेहरोत्रा के अनुसार दो दांत टूटने से झालरा को शिकार में पहले ही परेशानी हो रही थी, फिर भी वह अपने और जवानी की दहलीज पर खड़े तीन बच्चों के शिकार का इंतजाम कर लेती थी।

अब दरई ओर का नीचे का एक और दांत टूटने से एक ही दांत रह गया है। उसका यह तीसरा दांत इसी सप्ताह संभवत: किसी बाघ से भिड़ंत या शिकार के दौरान टूटा।

झालरा का झुमरू अब जाएगा सरिस्का
रणथंभौर अभयारण्य प्रशासन ने झालरा के चौथे प्रसव से हुए नर टाइगर ‘झुमरू’ के पिछले दिनों रेडियो कॉलर लगाया था। करीब तीन साल के इस बाघ को सरिस्का अभयारण्य भेजे जाने की संभावना है।

कब किसका दिल जीता
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह : 21 मई 2005, मुकेश अंबानी परिवार : नवंबर 2007, प्रियंका वाड्रा : नवंबर 2007





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