अजमेर.
कच्ची बस्ती व कृषि भूमि नियमन के मामलों में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के दखल के बावजूद इस मामले में यूआइटी की लगभग दो सप्ताह की प्रगति शून्य रही। मुख्यमंत्री को भेजी गई रिपोर्ट में भी इसे स्वीकार किया गया है।
नियमन की प्रकिया ठप होने पर पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने कलेक्टर एवं न्यास अध्यक्ष नवीन महाजन से नाराजगी व्यक्त की थी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने अपने स्तर पर नियमन की समीक्षा करने के लिए महाजन को कमेटी गठित करने और हर सप्ताह प्रगति रिपोर्ट भेजने की हिदायत दी।
महाजन ने अतिरिक्त कलेक्टर के के शर्मा की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर दी। न्यास ने मुख्यमंत्री कार्यालय को जो रिपोर्ट सौंपी है उसमें लंबित नियमन के प्रकरण सात हजार से अधिक बताए गए हैं, लेकिन नियमन जीरो बताया है।
दिक्कत यह है..
नियमन के मामलों में मुख्यमंत्री की रुचि के बावजूद यूआइटी में विशेषाधिकारी का पद लंबे अर्से से रिक्त है। हाल ही में सचिव ने उपसचिव चुन्नीलाल सैनी को विशेषाधिकारी पद का कार्यभार सौंपा गया है, लेकिन नियमानुसार नियमन पट्टे पर कार्यवाहक विशेषाधिकारी हस्ताक्षर नहीं कर सकते हैं।