बीकानेर.
सिर पर मंगल कलश लिए बालिकाएं और महिलाएं, मुंह से निकलते बोल ‘श्रीवल्लभ-बिठ्ठल गिरधारी-महाप्रभुजी की बलिहारी, मानसी गंगा श्री हरदेव-गिरिवर की परिक्रमा ले..’ जिस रास्ते से यह शोभायात्रा गुजरती हर ओर लोग श्रद्धा से झुक जाते।
वल्लभाचार्य जयंती के मौके पर गोपालजी मंदिर से निकली इस शोभायात्रा में बैंड पर बजती कीर्तन की धुनों के साथ ही प्रभु के चित्र व स्वरूप विराजित थे वहीं पुरुष, महिलाएं, बालक-बालिकाएं प्रभु के गुणगान किए जा रहे थे। कभी मंगलपाठ गूंजते तो कभी सात स्वरूपों का बखान होता और कभी चौरासी वैष्णवों की वार्ताएं।
गोपालजी मंदिर से रवाना होकर शोभायात्रा बिठ्ठलनाथ, गोवर्धननाथ, दाऊजी, मदनमोहनजी, श्यामसुंदरजी आदि मंदिरों की परिक्रमा कर मूंधड़ों की बगीची पहुंची जहां कीर्तन व उछब हुआ। हर मंदिर में विश्राम के साथ ही जहां प्रभु के दर्शन को श्रद्धालु उमड़े, वैष्णवजनों का आदर-सत्कार हुआ वहीं कारवां में नए लोग भी शामिल होते रहे।
इससे पूर्व शुक्रवार सुबह दाऊजी मंदिर में वल्लभाचार्य जयंती पर विशेष कार्यक्रम हुआ। मंगलादर्शन के बाद मंदिर की परिक्रमा शुरू हुई जिसमें महाप्रभुजी के तैलचित्र को सुखपाल में विराजित किया गया। मंगलकलश धारण किए महिलाओं और पुरुषों ने कीर्तन करते हुए मंदिर की परिक्रमा की।
इस मौके पर ठाकुरजी को खासतौर पर सात मेवों, ठौर आदि के थाल प्रसाद के रूप में चढ़ाए गए। गोवर्धननाथजी, बिठ्ठलनाथजी, श्यामसुंदर, मदनमोहनजी, गोपालजी आदि मंदिरों में भी जयंती के मौके पर ठाकुरजी का विशेष श्रंगार कर भोग लगाया, मंगलपाठ हुए और श्रद्धालुओं ने शीश झुकाया।