कोटा. वृद्ध, विधवा, परित्यक्ता तथा विकलांग पेंशन हड़पने के मामले का खुलासा होने के बाद सभी पेंशन खातों के भुगतान पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। पात्र और अपात्र लोगों की पहचान के बाद ही भुगतान की कार्रवाई की जाएगी। जिला कलेक्टर अभय कुमार ने दावा किया है कि पांच दिन में पात्र लोगों की सूची बनाकर अगले हफ्ते से उन्हें भुगतान शुरू कर दिया जाएगा। तीन सप्ताह में विभागीय कार्रवाई भी पूरी कर ली
कलेक्टर ने इस पूरे प्रकरण से निदेशक ट्रेजरी एंड एकाउंट, वित्त सचिव तथा सरकार को भी अवगत करा दिया है। उधर, उपखंड कार्यालय में दस पटवारी पात्र लोगों की सूची बनाने में लगे हैं। एसडीएम अरुण हसीजा ने बताया कि अगले सप्ताह तक पात्र लोगों की सूची बनाकर कोषाधिकारी को दी जाएगी।
इसके बाद अपात्र लोगों की पहचान कर उन्हें बुवलाया जाएगा और जरूरतमंदों से दुबारा नए फार्म भरवाकर उन्हें पेंशन स्वीकृति दी जाएगी। इस बीच, पेंशन प्रकरण में और भी लोगों पर गाज गिरने की संभावना है। जिला कलेक्टर मुताबिक पुलिस के साथ विभागीय स्तर पर जांच जारी है।
सहायक कोषाधिकारी व उप कोष कार्यालय (पेंशन) की जांच करने की जिम्मेदारी कोषाधिकारी को दी है। सीआई जसवंत सिंह ने कहा कि जिन दो आरोपियों उपकोष कार्यालय (पेंशन) के कनिष्ठ लिपिक रमेशचंद शर्मा तथा सहायक कर्मचारी आफताब कुरैशी के संबंध में रिकॉर्ड लिए जा रहे हैं। उनकी जांच के बाद ही गिरफ्तारी होगी।
कोषाधिकारी ने नहीं की कार्रवाई
उप कोष कार्यालय (पेंशन) कोषाधिकारी के अधीन आता है। इस कार्यालय में हुए फर्जीवाड़े की जांच और पुलिस कार्रवाई कोषाधिकारी को करनी थी। मामला भी कोषाधिकारी की तरफ से दर्ज कराना चाहिए था लेकिन, ऐसा नहीं हुआ।
एसडीएम अरुण हसीजा स्वयं 29 व 30 अप्रैल 2008 को उपकोष कार्यालय (पेंशन) गए और पेंशन भुगतान आदेश जारी करने की प्रक्रिया व रिकॉर्ड देखा। स्वीकृत व पेंशन भुगतान आदेशों की जांच की व गड़बड़ी पकड़ी।
एटीओ के लिए डीटीए को लिखा
सहायक कोषाधिकारी (एटीओ) को एपीओ करने के बाद अब अग्रिम कार्रवाई के तहत कलेक्टर ने निदेशक, ट्रेजरी एंड एकाउंट को लिखा है।
गड़बड़ियों का खुलासा शुरू
पेंशन भुगतान के लिए वर्ष 2006 से ट्रेजरी ने नई व्यवस्था शुरू की। एसडीएम के कम्प्यूटर से स्केन हस्ताक्षर से पेंशन की स्वीकृति दे दी जाए ताकि कार्य आसान हो जाए और लोगों को इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यहीं से गड़बड़ी की शुरुआत हुई। स्केन हस्ताक्षर से फर्जी पेंशन स्वीकृतियां जारी कर दी गईं।
एसडीएम अरुण हसीजा ने कोटा में पदभार ग्रहण करते ही इस व्यवस्था को बंद किया लेकिन, इसके बावजूद फर्जीवाड़ा होता रहा।
सहायक कर्मचारी (प्रोसेस सरवर प्रतिनियुक्ति भू-अभिलेख अनुभाग) आफताब अहमद कुरैशी तीन कॉपियों में से मूल कॉपी उपभोक्ता के पास भेजना बताता रहा और फोटो कॉपी ट्रेजरी व एसडीएम ऑफिस में रखता रहा। इसके पीछे मंशा यह रही कि जब मूल दस्तावेजों की जरूरत पड़े तो वो न मिलें। एसडीएम हसीजा के मुताबिक मूल दस्वाजेज कार्यालय में रखे जाने चाहिए थे।
जनवरी 2008 से एसडीएम ने ट्रेजरी, एसडीएम ऑफिस तथा पेंशन धारक को भेजे जाने वाले फार्म अलग-अलग रंग में कर दिए। सभी के लिए मूल दस्तावेज की व्यवस्था कर दी गई।
तीनों पर एसडीएम स्वयं साइन करने लगे। इसके बावजूद पुराने फार्म की फोटो कॉपी जिसपर हस्ताक्षर होते थे, उस पर नया नाम लिखकर स्वीकृति जारी की गई।
विधवा को वृद्ध बताकर भी पेंशन भुगतान उठाए गए हैं।
आंच पालिकाओं तक
नगर निगम क्षेत्र में हुए पेंशन घोटाले को देखते हुए जिला कलेक्टर ने बीडीओ व पालिकाओं के एटीओ समेत सक्षम अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने स्तर पर दस्तावेजों की जांच करवा लें ताकि, गड़बड़ी की आशंका खत्म हो।