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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़पानी से खाली होते पंजाब को अब पानी की कीमत समझ में आ रही है। अगर नई जल नीति को हरी झंडी मिल गई तो सरकार पानी के इस्तेमाल का सरकार हिसाब ले सकेगी। नीति के तैयार किए गए ड्राफ्ट में कृषि एवं उद्योगों में उत्पादन को पानी के इस्तेमाल से जोड़ने की बात कही गई है। कोई किसान या कारखाने वाला जितना पानी लेगा, उसे उसी हिसाब से उत्पादन देना होगा। नीति में पानी की फिजूलखर्ची रोकने पर इतना जोर है कि कुआं खोदने के लिए भी इजाजत लेने का सुझाव दिया गया है।
मुख्य सचिव की अगुवाई वाली स्टेट वाटर रिसोर्स कमेटी ने इस जल नीति को शुक्रवार को हरी झंडी दे दी। इसे मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली स्टेट वाटर काउंसिल को भेजा जाएगा। यह सारी कवायद राज्य में गिरते भू-जल स्तर को बचाने के लिए की जा रही है। नीति में जल संसाधनों के विकास व प्रबंधन के लिए रैगुलेटरी अथॉरिटी बनाने का भी सुझाव दिया गया है।
पानी खींचने वाली फसलों पर नजर
कृषि के लिए कहां-कितना पानी इस्तेमाल हो रहा है, जल नीति में इसका हिसाब रखने की बात कही गई है। सूखे इलाकों में ऐसी फसलों पर नजर रखी जाएगी जो पानी ज्यादा खींचती हैं।
पंजाब में पानी का ..
अभी इस पर नजर रखने का कोई मैकेनिज्म नहीं है। उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले पानी की री-साईकलिंग पर भी नई नीति में प्रावधान होगा। इसके अलावा पंचायती राज, नगर पालिकाओं, एनजीओ और निजी सैक्टर को जल प्रबंधन, योजना और ऑपरेशन मैनेजमैंट में भागीदार बनाया जाएगा। अधिक जल दोहन रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की वकालत की गई है। सीवरेज और उद्योगों का पानी रीसाइकलिंग करने को कहा गया है। कृषि में स्प्रिंकल और ड्रिप सिंचाई को बढ़ावा देने की भी बात है। यही नहीं कृषि में पानी के प्रयोग के लिए भागीदारी इरिगेशन मैनेजमैंट स्कीम चलाने को उत्साह देने को कहा गया है।
पेयजल को पहली प्राथमिकता
नई नीति में पेयजल को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। उसके बाद पर्यावरण, सिंचाई, हाइड्रो पावर, थर्मल पावर, एग्रो इंडस्ट्री और अन्य उद्योगों को शामिल किया गया है। जल नीति में पानी का डाटा बैंक तैयार करने की भी बात की गई है ताकि उसके आधार पर ही भविष्य की योजनाएं तय की जा सकें।
जरूरत का एक-तिहाई भी नहीं रिपोर्ट में बताया गया है कि पंजाब को 50 मिलियन एकड़ फीट पानी की जरूरत है, पर राज्यों की तीनों नदियों के 34.34 एमएएफ सरफेस वाटर में से पंजाब को 17.37 एमएएफ पानी ही मिलता है। आबादी बढ़ने, शहरीकरण, औद्योगिकीकरण और ज्यादा पानी लेने वाली फसलें उगाने के कारण पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। परिणाम यह हुआ है कि पंजाब का 79 फीसदी हिस्सा डार्क जोन में पहुंच गया है। 25 फीसदी हिस्से में वाटर लॉगिंग की समस्या है। सीवरेज और उद्योगों का पानी जमीन में जाने से प्रदूषण फैल रहा है।