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अन्नू की पसंद सूफी संगीत

मुंबईअभिनेता अन्नू कपूर में कहीं न कहीं एक गायक छुपा हुआ है। फिल्म ‘तेजाब’ में उनके द्वारा किए गए किरदार से इस बात को और बल मिलता है, जिसमें वे एक गायक बनने की ख्वाहिश रखते हैं। अन्नू को संगीत की विधाओं में सूफी संगीत बहुत ज्यादा पसंद है।

अन्नू को म्यूजिकल शोज का संचालन बहुत पसंद है। कारण, एक तरफ संचालन होता है और दूसरी तरफ बीच-बीच में अपना गला साफ करने का मौका भी मिल जाता है। अन्नू ने कई म्यूजिकल शोज के लिए एंकरिंग की है और उन्हें संगीत का अच्छा ज्ञान भी है। इसी श्रंखला में वे ‘जुनून कुछ कर दिखाने का’ नामक शो भी होस्ट कर रहे हैं।

अन्नू ने पहले ‘अंताक्षरी’ नामक संगीतमय कार्यक्रम में खूब धूम मचाई थी। वे कहते हैं कि एक कलाकार होने के नाते उन्हें अपनी रचनात्मक क्षमता को उभारने का पूरा हक है। उन्हें यकीन है कि लोग संगीतमय कार्यक्रमों में उन्हें देखना पसंद करते हैं। उनके पुराने परफॉर्मेस के आधार पर ही ‘जुनून कुछ कर दिखाने का’ के प्रोड्यूसर ने उनसे संपर्क किया और वे इस शो को करने के लिए तैयार हुए। यह शो एनडीटीवी इमेजिन पर प्रसारित किया जाएगा और हर बार इसमें छह प्रतिभागी भाग लेंगे। इसके तहत राहत फतहे अलीखान की सूफी टीम, आनंद राज आनंद की फिल्मी टीम और ईला अरुण की लोक गीत विशेषज्ञ टीम शिरकत करेगी।

इस शो की खास बात है कि ऑडियंस को किसी एक कलाकार को चुनने की अपेक्षा संगीत की इन तीन विधाओं में से किसी एक विधा को वोट करना होगा। अन्नू ने खुद की पसंद के बारे में बताया कि वैसे तो फिल्मों में हर तरह का संगीत जरूरी है, लेकिन वे सूफी संगीत के दीवाने हैं। सूफी संगीत उनके मन को शांति देता है।

अन्नू का मानना है कि सूफी संगीत को जानने के लिए उसके इतिहास और संगीत के पीछे छुपे भावार्थ को समझना जरूरी होता है। अन्नू ने काफी फिल्मों में काम किया है, लेकिन सीरियल्स में उनकी रुचि नहीं है। वे धारवाहिकों में खुद को फिट नहीं मानते। आखिरी बार वे अब्बास मस्तान की फिल्म ‘एतराज’ में वर्ष 2004 के दौरान नजर आए थे। इसके बाद से उन्होंने सिर्फ म्यूजिकल शोज ही ज्यादा किए हैं। उनकी एक फिल्म ‘फकीरा’ जल्दी ही रिलीज होने वाली है और नई फिल्म ‘दो दिलों के खेल में’ भी वे नजर आएंगे।





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