इंफाल. छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर में विवादित ‘सलवा जुडूम’ जैसा ही अभियान अब मणिपुर में भी शुरू होने जा रहा है। मणिपुर सरकार ने उग्रवादियों से आत्मरक्षा के लिए अब दो गांवों के 500 से ज्यादा लोगों को हथियार देने का फैसला किया है। संयोग कुछ ऐसा है कि छत्तीसगढ़ में विपक्ष में बैठी कांग्रेस मणिपुर में सत्तासीन है।
मुख्यमंत्री ओ इबोबी सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार रात राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में फैसला किया गया कि थोबल जिले के हेरोक गांव के 300 और पश्चिमी इंफाल के लिलोंग चाजिंग गांव के 200 लोगों को हथियार मुहैया कराए जाएंगे। इन ग्रामीणों को स्पेशल पुलिस अधिकारी का दर्जा देकर ट्रेनिंग पूरी होने पर 3000 रुपए प्रतिमाह का भत्ता भी दिया जाएगा।
छत्तीसगढ़ के सलवा जुडूम का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, वहीं मणिपुर में ‘स्पेशल पुलिस अधिकारियों’ का पहला बैच जून तक तैयार हो जाने की संभावना है। इनके लिए हेरोक में तीन और लिलोंग में दो बैरक तैयार किए जाएंगे। उग्रवादियों द्वारा निर्दोष नागरिकों की हत्या, अपहरण और फिरौती से परेशान ग्रामीणों ने कुछ समय पहले सरकार से आत्मरक्षा के लिए हथियार दिए जाने की मांग की थी।
सूत्रों का कहना है कि स्पेशल पुलिस अधिकारियों की भर्ती जम्मू-कश्मीर की तरह की जाएगी और आने वाले समय में कुछ और गांवों में भी लोगों को हथियारों से लैस किया जा सकता है।