नई दिल्ली.भारतीयों के खानपान के कारण विश्व में खाद्य संकट पैदा होने के दावों के विपरीत सच्चई यह है कि मात्र तीन प्रतिशत भारतीयों के ही खानपान में बदलाव आया है। यह बदलाव भी ऐसा है, जिससे खाद्यान्न संकट उत्पन्न होने का कोई कारण नहीं दिखता है। दक्षिण भारत में बेकरी इंडस्ट्रीज में विकास के कारण वहां गेहूं की खपत में इजाफा हुआ है, तो दूसरी ओर चावल की खपत भी घट गई है। मतलब मामला बराबर हो जाता है।
आंकड़ों के मुताबिक एक भारतीय की तुलना में एक आम अमेरिकी प्रति दिन करीब छह गुना अधिक भोजन करता है। पेटू होते अमेरिकियों की इस प्रवृति का खुलासा अमेरिका की ही एक सरकारी एजेंसी अमेरिकन इकोनोमिक रिसर्च ने किया है। दूसरी ओर भारत में प्रति व्यक्ति, प्रति दिन खाद्यान्न उपलब्धता का औसत मात्र 400 ग्राम है। यह उस औसत से थोड़ा ही ज्यादा है, जब भारत ने आजादी से ठीक पहले बंगाल का भीषण अकाल देखा था।
.एक भारतीय की थाली में औसतन 177 ग्राम चावल, 154 ग्राम गेहूं, करीब 10 ग्राम चना और 31 ग्राम दाल होता है। अन्य अनाजों जैसे बाजारा, मक्का को भी जोड़ दिया जाए, तो एक थाली में औसतन 422 ग्राम खाद्यान्न होता है। यह वह आंकड़ा है, जिसे खाद्य व कृषि संगठन (एफएओ) ने जारी किया है। दूसरी तरफ एक आम अमेरिकी की थाली में औसत 2400 ग्राम से अधिक खाद्यन्न होता है। इससे अलावा मांस, दूध व दूध से बने उत्पाद अलग से होते हैं।
अमेरिकी संस्था इकोनोमिक रिसर्च ने वर्ष 2007 में आम अमेरिकियों के ज्यादा खाने की प्रवृति संबंधी रिपोर्ट जारी करते हुए एक सलाह जारी की थी। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि अधिक खाने के कारण अमेरिकियों को औसत वजन में 7 से 8 किलो का इजाफा हुआ है, जो काफी खतरनाक संकेत हैं। इसके अलावा इस संस्था ने अमेरिकियों के लिए एक एडवाइजरी नोट भी जारी कर बताया था कि उन्हें क्या और कितना खाना चाहिए, जिससे वे मोटापा या रक्तअल्पता का शिकार होने से बच सकते हैं।
फूड एंड न्यूट्रिशन मैनेजमेट इंस्टीट्यूट, हैदराबाद के प्रमुख जीआर रमैया के अनुसार मात्र तीन प्रतिशत भारतीय ऐसे हैं, जिनके खानपान में बदलाव आया है। मगर, यह बदलाव ऐसा है, जिससे खाद्य संकट नहीं पैदा होता है।
अनाज महंगे क्योंकारें खा रही अनाज
>> अमेरिका अपना पेट्रोलियम भंडार बचाए रखने के लिए बायो फ्यूल को बढ़ावा दे रहा है। वहां जितना मक्का उत्पादन होता है उसका आधा एथनॉल बनाने में खर्च होता है। उसने यूरोप में भी इसके लिए प्रोत्साहित किया है।
>> विश्व के मक्का उत्पादन में अमेरिका का हिस्सा 40 फीसदी है और कुल विश्व निर्यात का 50 फीसदी अमेरिका को होता है।
पेट्रोलियम कीमतें
>> पेट्रोलियम कीमतें बढ़ने से परिवहन खर्च बढ़ा है। किसी भी देश से विश्व के दूसरे हिस्से में पहुंचने वाला अनाज इसलिए महंगा हो गया है। कीमतें बढ़ने के पीछे अमेरिका ही है।
वायदा कारोबार>> अमेरिका ने खाद्यान के वायदा कारोबार में अरबों-खरबों डॉलर लगा रखे हैं। इन सटोरियों के चलते दुनिया में खाद्यानों के दाम बढ़े।
अमेरिका में बहुउपयोगी वाहन की टंकी के लिए एथनॉल 204 किग्रा मक्के से बनता है। इससे आदमी तीन साल तक रोटी खा सकता है।
डाइट
अमेरिका 3790 कैलोरी
भारत 2466 कैलोरी
पोषणअमेरिका पोषण 18.7 करोड़ लोग मोटेभारत 47 करोड़ कुपोषित
दु:खदअमेरिका 1720 अरब रु. का खाना हर साल बर्बादभारत 6000 बच्चे रोज भूखमरी के शिकार