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हर मैच पर है एसीयू की नजर

चंडीगढ़वनडे या टेस्ट क्रिकेट में मैच फिक्सिंग को रोकने के लिए आईसीसी की एंटी करप्शन यूनिट(एसीयू) काम करती है। ठीक इसी तरह इंडियन क्रिकेट लीग यानि आईपीएल में भी मैचों पर नजर रखने के लिए आईपीएल ने एंटी करप्शन यूनिट को तैनात किया है। आईपीएल के 8 वेन्यु पर एसीयू का एक-एक अधिकारी तैनात है। ये अधिकारी पुलिस और सेना के बैकग्राउंड से है और इन मामलों के एक्सपर्ट भी है। हालांकि किसी भी देश की वनडे या टेस्ट सीरीज में आईसीसी की टीम इस काम को देखती है लेकिन आईपीएल भारत की इटर सिटी क्रिकेट लीग है तो लिहाजा उसे अपनी एंटी करप्शन यूनिट तैयार करनी पडी। आईपीएल में वल्र्ड के टॉप क्रिकेटर विभिन्न टीमों से खेल रहे हैं और मैच फिक्सिंग या इससे जुड़े किसी भी विवाद से बचने के लिए बोर्ड ने अपनी यह डयूटी भी पूरी कर दी।

प्लेयर्स के डोप टेस्ट

जहां एसीयू की टीम अपना काम कर रही है तो वही खिलाड़ियों का डोप टेस्ट भी आईपीएल में किया जा रहा है। इसके लिए बाकायदा एक मेडिकल टीम सभी वेन्यु पर काम कर रही है। डोप टेस्ट पहली बार 2005-06 में भारत में हुई आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान हुए थे। इसके बाद आईसीसी वल्र्ड कप में भी खिलाड़ियों के डोप टेस्ट लिए गए थे।

क्या है प्रोसिजर डोप टेस्ट मैच के बाद होता है। किस खिलाड़ी का टेस्ट होना है यह मैच रेफरी तय करता है। आमतौर पर जो खिलाड़ी उस मैच में बेहतर खेल दिखाता है उसी का डोप टेस्ट लिया जाता है लेकिन यह पूरी तरह मैच रेफरी पर ही निर्भर करता है कि वह किस खिलाड़ी का नाम मेडिकल टीम को रेफर करता है। चाहे वो गेंदबाज, बल्लेबाज या फील्डिर, किसी भी का भी नंबर डोप टेस्ट के लिए लग सकता है। यह नियम दोनों टीमों पर लागू होता है। उदाहरण के तौर पर मोहाली में चैंपियंस ट्रॉफी के एक मैच के दौरान 12वें खिलाड़ी का डोप टेस्ट लिया गया था।





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