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जरा सा हंस दो

पूरे देश में हंसी का तोहफा बांटने वाले हास्य सम्राट आर.डी. बाहेती कहते हैं, हमारे यहां सुबह सुबह ठहाके गूंजते हैं या घर के मंदिर की घंटियां। परिवार में हाल ही शामिल हुईं बहू शिविका कहती हैं कि पहले दिन तो मुझे बड़ा अजीब सा लगा, जब देखा कि पूरा परिवार डाइनिंग टेबल पर बिना बात ही ठहाके लगा रहा है। बाद में इस घर की रिवायत जानने पर मुझे भी हंसी आने लगी और मैं भी हंसोड़ों की इस टोली में शामिल हो गई। सबके साथ हंसने में मुझे बड़ा मजा आता है।

नया दिन नया किस्सा : हंसी के साथ दिन शुरू हो तो पूरा दिन हंसते- हंसते ही बीत जाता है यह कहना है रामकिशोर लखोटिया एंड फैमिली का। ट्रांसपोर्ट और गारमेंट बिजनेस करने वाले रामकिशोर कहते हैं, हास्यासन करने के बाद सुबह घर के किसी एक सदस्य को पिछले दिन का कोई गुदगुदाने वाला किस्सा सुनाना होता है। ऐसा करने से फैमिली के एक मैम्बर की खुशी को सभी शेयर कर पाते हैं और हंसना-हंसाना भी हो जाता है। यह परम्परा पिछले कई सालों से चली आ रही है।

कहीं कुछ गुम हो गया :

शादी से पहले मैं रिजर्व नेचर होने के कारण कभी-कभार ही मुस्कुराती थी। यह कहना है अनुषा आदित्य का। मेरी शादी ऐसी फैमिली में हुई जहां छोटी छोटी बातों पर भी परिवार के सभी सदस्य खिलखिला कर हंसते थे। मानो, सभी हंसी के शहंशाह हों। एक बार मेरे देवर ने रोचक किस्सा सुनाया और सब जोर जोर से हंसने लगे।

तभी ससुर मुझे देखकर बोले-‘अरे, कहीं कुछ गुम हो गया’ और वे कुछ तलाशने लगे। मैंने पूछा पापा क्या गुम हो गया? वह बोले-तेरी हंसी बेटा। मुझे उनकी बात सुन कर जोर से हंसी आई और यह अहसास भी हुआ कि वह मुझसे कितना लगाव रखते हैं। यह बात मेरे दिल को छू गई और तब से मैं मेरी फैमिली की तरह ही सबके साथ हंसती हूं। मगर अभी भी मेरे पापाजी मुझसे मजाक करते हैं कि बेटी कहीं गुम तो नहीं हो जाएगी ना।





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