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इसलिए हारा कॉलेस्ट्रॉल

जयपुर विश्व स्वास्थ्य संगठन की इसी हफ्ते जारी हुई रिपोर्ट में भले ही कहा गया हो कि अगले दस साल में दुनिया के 60 फीसदी हृदय रोगी भारत में होंगे, लेकिन राजस्थानियों के लिए खुशखबरी है। यहां के लोगों की मेहनत और पारंपरिक खान-पान उन्हें हृदय रोग से बचा रहा है, जिससे प्रदेश के लोग देश की तुलना में हृदय रोग की चपेट में कम आए हैं।

राजस्थान में कम है हृदय रोग :

हृदय रोग के मुख्य कारणों में से एक उच्च कॉलेस्ट्रॉल, जहां भारत में 40 से 45 प्रतिशत लोगों में हैं, वहीं राजस्थानियों में 30 फीसदी वयस्कों में ही यह ज्यादा है। बीस साल से हृदय रोग व कॉलेस्ट्रॉल की रिसर्च से जुड़े जयपुर के फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल के रिसर्च डायरेक्टर डॉ. राजीव गुप्ता बताते हैं कि राजस्थान के लोगों में कॉलेस्ट्रॉल का स्तर कम है। वे कहते हैं राज्य में मोटापा कम है व पारम्परिक खाना दिल के लिए ठीक है।

राजस्थान 11 वें स्थान पर :

भारत सरकार से संबद्ध इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक पूरे भारत में सबसे ज्यादा हृदय रोगी गोवा, केरल व पंजाब में है। राजस्थान भारत में 11 वें स्थान पर है। केरल व गोवा में लोगों में मोटापा कम है। फिर भी वहां सबसे ज्यादा हृदय रोगी हैं। हाई बीपी, डायबिटिज व तनाव की वजह से भी केरल के लोगों में कॉलेस्ट्रॉल का स्तर ज्यादा है। साथ ही वहां का खाना भी इसका बड़ा कारण है। राजस्थान के पड़ोसी राज्यों में पंजाब सबसे अधिक कॉलेस्ट्रॉल वाले राज्यों में हैं। जबकि वहां के लोग भी मेहनत करते हैं। लेकिन वहां का खान-पान दिल की बीमारियों को आमंत्रण देने वाला है। घी व मक्खन का ज्यादा प्रयोग व हैवी फूड की वजह से कॉलेस्ट्रॉल का स्तर ज्यादा है। राज्य के सबसे बड़े अस्पताल एसएमएस में हृदय रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आर के मधोक कहते हैं कि उनके पास आने वाले मरीजों में से एक तिहाई पंजाब व हरियाणा से आते हैं।

पूरे राजस्थान से आने वाले मरीजों में भी बड़ी संख्या शहरी लोगों की है। राजस्थान में शेखवाटी, जयपुर व जोधपुर में सबसे ज्यादा लोग उच्च कॉलेस्ट्रॉल से पीड़ित हैं।

जोधपुर में गांधी अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. विनीत जैन कहते हैं कि जोधपुर में खानपान में घी-तेल का अधिक प्रचलन और मिठाई का शौक कोलेस्ट्रॉल रोगियों की तादाद बढ़ा रहा है। आउटडोर में आने वाले रोगियों में 15 फीसदी में अधिक कोलेस्ट्रॉल की शिकायत है।

कॉलेस्ट्रॉल एक तरह का कैमिकल (स्टीराइड) है, जो रक्त में पाया जाता है। इसका सीमित मात्रा में होना शरीर के विकास के लिए आवश्यक ह।ै इससे कोशिकाओं की लाइनिंग बनती है, खास तौर पर ब्रेन सेल की। ‘जब खराब कॉलेस्ट्रॉल एलडीएल (लो डेंसिटी लिपिड), वीएलडीएल, आईडीएल व ट्राई ग्लिसराइड की मात्रा ज्यादा हो जाती है, तब ये धमनियों में जमना शुरू हो जाता है और रुकावट पैदा करता है।

यह ब्लॉकेज दिल की धमनियों में हार्ट अटैक व एंजाइना का रूप लेती है। दिमाग की धमनियों में रुकावट से स्ट्रोक होता है, जिससे लकवा हो सकता है।’ फोर्टिस-एस्कॉर्ट्स अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीब रॉय के अनुसार शरीर की जरूरत के अनुसार 65 प्रतिशत कॉलेस्ट्रॉल की आपूर्ति स्वत: ही लीवर से हो जाती है। बाकी कॉलेस्ट्रॉल डाइट के जरिए जाता है। जयपुर में प्रतिदिन रूटीन चैकअप के लिए आने वाले 10 में से 3-4 में कॉलेस्ट्रॉल का स्तर ज्यादा होता है।

खून में एलडीएल कॉलेस्ट्रॉल की मात्रा 100-125 मिलिग्राम से ज्यादा होने पर यह धमनियों में रुकावट पैदा करता है। जिन्हें हृदय रोग हो या होने का खतरा हो, उनमें यह स्तर 70 मिग्रा से कम होना चाहिए। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल कासलीवाल बताते हैं कि राजस्थान में रूटीन चैकअप के लिए आने वाले 20 से 30 फीसदी लोगों में अच्छा कॉलेस्ट्रॉल एचडीएल का कम और बुरा कॉलेस्ट्रॉल ज्यादा होता है। वे कहते हैं जयपुर के लोगों का खान-पान गरिष्ठ है। यहां के लोग तला हुआ और दाल-बाटी चूरमा जैसी घी में बनने वाली वस्तुओं का बड़ी मात्रा में सेवन करते हैं, जिससे बाद में खराब कॉलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ता है। वहीं ग्रामीण लोगों में शारीरिक श्रम व भोजन में मोटे अनाज की वजह से कॉलेस्ट्रॉल संबंधी कम समस्याएं दिखती हैं।

दिल की बीमारी के सात चोर दरवाजे हैं जहां से खराब कॉलेस्ट्रॉल आपके दिल पर आक्रमण करते हैं- कॉलेस्ट्रॉल का बढ़ा स्तर, तनाव, तंबाकू (सिगरेट या चबाना), हाई बीपी, हाई डायबिटीज, मोटापा व अनुवांशिक कारण। अगर लोग इनसे बचें तो उनका दिल भी सुरक्षित रहता है। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. जितेन्द्रसिंह मक्कड़ कहते हैं कि 20 वर्ष के बाद हर पांच साल में व 35 के बाद हर वर्ष कॉलेस्ट्रॉल चैक कराएं। यदि किसी को चलने-फिरने में सांस चढ़ती हो या दिल के आसपास दर्द हो तो उन्हें तुरंत कॉलेस्ट्रॉल चैक करवाना चाहिए।

एमबी अस्पताल, उदयपुर के अधीक्षक व हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके कौशिक बताते हैं कि उदयपुर में जिन रोगियों में कोलेस्ट्रोल अधिक होने की शिकायत मिली, उनमें से ज्यादातर में मोटापा व डायबिटीज की शिकायत भई थी।





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