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शिक्षा अधिकारी समेत 7 के खिलाफ मुकदमा दर्ज

कोटा. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने सर्व शिक्षा अभियान कार्यालय की ओर से खरीदे स्कूली बैग की क्वालिटी को घटिया मानते हुए जांच के बाद जिला शिक्षा अधिकारी का कार्य देख रहे हुकमचंद गुप्ता, सहायक परियाजना अधिकारी सहित सात जनों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए मुख्यालय को भी लिखा गया है। जिले में एससी-एसटी के छात्रों को स्कूल बैग दिलाने के लिए सर्वशिक्षा अभियान के तहत 26.70 लाख रुपए का बजट निर्धारित किया गया था। इसमें हुई गड़बड़ी की शिकायत पर ब्यूरो की टीम ने छापा मारकर इसमें कई अनियमिताएं पकड़ीं थीं। यहां से खरीद संबंधी सभी पत्रावलियां जब्त कर ली गईं हैं।

जांच में मिली कई अनियमितताएं : विभाग ने जब यहां बैग खरीद प्रकरण की जांच की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। ब्यूरो के अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि स्थानीय अधिकारियों ने जयपुर से भेजे बैग के सैम्पल को ही बदल दिया। अधिकारियों ने जब जानकारी चाही तो बताया गया कि वह गुम हो गया। दूसरा सैम्पल प्राप्त करने के लिए अधिकारियों ने झालावाड़ आने-जाने पर ही हजारों रुपए खर्च कर दिए।

15 सौ बैग कम मिले:
ब्यूरो को जांच करने पर यहां स्टोर में 15 सौ बैग कम मिले। एक बैग विभाग ने लगभग 70 रुपए में खरीदा था। इस तरह लगभग एक लाख रुपए की चपत सरकार को लगाई गई। यहां तक कि अधिकारियों ने बिना गिने ही सप्लाई प्राप्त कर ली। न तो उसकी क्वालिटी जांची, न ही उसकी गणना की गई।

बजट 26.70 लाख का, खरीदे 15.10 लाख के:
सूत्रों ने बताया कि सर्वशिक्षा अभियान में बैग खरीदने के लिए 26.70 लाख रुपए स्वीकृत किए थे। इसमें से स्थानीय अधिकारियों ने 11.60 लाख रु. अन्य मद में खर्च कर दिए। केवल 15.10 लाख रु. के ही बैग खरीदे गए।

समिति में प्रोबेशनर आईएएस भी:
जिस समिति ने बैग खरीद को स्वीकृति दी, उसमें कलेक्टर के प्रतिनिधि के रूप में प्रोबेशनर आईएएस सरवन कुमार भी शामिल थे। एसीबी सभी की भूमिका की जांच कर रही है।

बारां की बुक डिपो से खरीदे थे बैग विभाग ने माना कि समिति से सैम्पल पास कराकर बारां की बुक डिपो से बैग खरीदे थे। जैसे ही एसीबी ने बैग पकड़े, संस्था का भुगतान रुकवा दिया गया है। एसएसए कार्यालय से इन बैग का भुगतान कर दिया गया था।

दफ्तर में दहशत:
ब्यूरो की कार्रवाई के बाद एसएसए कर्मचारी दहशत में हैं। भास्कर ने जब उनसे बैग खरीद के बारे में जानकारी चाही तो सभी ने मुंह बंद कर लिया। उन्होंने कहा कि यह मामला एसीबी में चल रहा है इसलिए वे कुछ नहीं कह सकते। काफी कुरेदने पर उन्होंने दबी जबान से स्वीकार किया कि बैग की स्वीकृति देने में प्रशासनिक अधिकारियों की भी भूमिका है। उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।





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