जालंधर यह बात सामने आ चुकी है कि राज्य के कुछ नेता, सुरक्षा एजैंसियों में सक्रिय काली भेड़ों और तस्करों के साथ मिलकर नशे का कारोबार कर रहे हैं। ऐसे कुछ सफेदपोश नेताओं को बेनकाब करने के लिए सुरक्षा एजैंसियां पूरी तरह से प्रयास कर रही हैं। सुरक्षा एजैंसियों ने रियासत के दस बड़े नेताओं पर शक जाहिर किया है।
सोंधी व तस्करों से पूछताछ में पता चले नाम
हाल ही में गद्दी पर बैठने वाले अकाली दल के एक नेता पुरुषोत्तम सोंधी और तस्करों से हैरोइन की बड़ी खेप बरामद होने के बाद खादीधारियों पर एजैंसियों की नजर है। यह वे महानुभाव हैं जिनके नाम सोंधी और अन्य तस्करों से हुई पूछताछ में सामने आए हैं।
कोई भी राजनीतिक दल अछूता नहीं
खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, राज्य का कोई राजनीतिक दल इनसे अछूता नहीं है। एक साल में तीन अलग-अलग मामलों में डीआरआई ने दो अकाली और एक कांग्रेसी नेता से चालीस करोड़ की हैरोइन बरामद की। केंद्रीय एजैंसियों के पास पुख्ता जानकारी है कि बड़े तस्कर हैरोइन तस्करी के लिए कुछ नेताओं की मदद ले रहे हैं। ये हर महीने दो से तीन बड़ी खेप दिल्ली व अमृतसर के एयरपोर्टो तक पहुंचाते हैं। एजैंसियों की सख्ती के कारण कुछ समय से पाक से लगती सीमा से इन शहरों तक हैरोइन पहुंचाना मुश्किल हो गया है।
तस्करों को सरंक्षण दे रहे हैं नेता
कुछ अकाली नेताओं पर पहले भी चूरा-पोस्त की तस्करी के आरोप लगे हैं। एक भाजपा नेता पर दोआबा में राजस्थान और मध्य प्रदेश से चूरा पोस्त लाकर सप्लाई करने का आरोप लगा था।
खादी के दामन..
खुफिया विभाग ने साल भर पहले नेताओं और तस्करों पर एक रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें दोआबा के नौ बड़े तस्करों का कई नेताओं के सबंध का संबंध का खुलासा हुआ था। इस रिपोर्ट में महिला डॉन जीवन लता के राजनीतिक सबंधों का खुलासा किया गया था, लेकिन सरकार बदलते ही इसे अलमारी में बंद कर दिया गया था। अब इसे फिर से निकाला गया है।
नशे के कारोबार में लिप्त नेताओं में से एक मालवा, पांच माझा और चार दोआबा से सबंध रखते हैं। राज्य खुफिया विभाग के एक अफसर के अनुसार माझा और दोआबा में तस्करों से संबंध रखने वाले कई लोग चुनाव मैदान में हैं।
खादी का खाकी पर दबाव
तरनतारन में तो एक बड़े नेता ने पुलिस पर दबाव डालकर बीएसएफ द्वारा पकड़े गए एक तस्कर का चालान समय पर कोर्ट में पेश नहीं होने दिया जिससे उसको जमानत मिल गई। इसी तरह के एक अन्य मामले में एक नेता ने अपने प्रभाव से जांच अपने चहेते पुलिस अफसर को दिलवा दी और समर्थक तस्कर का मामला रफा-दफा करवा दिया। जबकि एक मंत्री का चुनाव एजैंट ही तस्करी के मामले में पकड़ा गया। बीएसएफ ने सीमा पर सक्रिय 150 तस्करों की सूची पुलिस को सौंपी है। जिसमें अधिकांश किसी ना किसी राजनीतिक दल से संबंध रखते हैं। यही एक बड़ा कारण है कि पुलिस भी इन पर हाथ डालने से डरती है।
रंगे हाथों पकड़ने की ताक में एजैंसियां
सुरक्षा एजैंसियां इस मामले में काफी संयम से काम ले रही हैं। जिन नेताओं के नाम सामने आए हैं। उन्हें केवल शक के आधार पर पकड़ा नहीं जा सकता इसलिए इनको हैरोइन के साथ पकड़ने की रणनीति बनाई गई है।
बादल के निर्देश पर तैयार की जा रही है सूची
अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने इस मामले को काफी गंभीरता से लिया है। उनके निर्देश पर ऐसे नेताओं की सूची तैयार की जा रही। इसका जिम्मा राज्य की खुफिया एजैंसी को दिया गया है।