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हंसते-हंसते कट जाएं रस्ते

भोपालआबकारी विभाग से रिटायर हुए सीबी चंसोरिया पत्नी की मृत्यु के बाद इस कदर अकेलेपन से घिर गए थे कि उन्हें कई बीमरियां हो र्गई। उनकी आंख की रोशनी कम होने लगी और स्वभाव में भी गुस्सा घुलने लगा। वे यह मान चुके थे कि उनका जीवन अब दो या चार साल का ही बचा है। फिर बच्चों के कहने पर वे हास्य क्लब से जुड़े। आज बात-बात पर ठहाका लगाने और युवाओं जैसे जोश से भरे श्री चंसोरिया 70 साल की आयु में भी बगैर चश्मा लगाए अखबार पढ़ लेते हैं।

अकेले श्री चंसौरिया ही नहीं, राजधानी के अनेक ऐसे लोग हैं जिनका मानना है कि हंसी ने उनका जीवन ही बदल दिया। ऐसे ही एक हास्य क्लब के सदस्य आईएएस अफसर जब्बार ढाकवाला ने भास्कर को बताया कि उनकी लेखन में रुचि है, लेकिन काम अधिकता की वजह से वे इस ओर ध्यान केंद्रित नहीे कर पाते थे। एक बार हास्य क्लब से अपने आप को जोड़ने के बाद वे न सिर्फ लेखन को पर्याप्त समय दे रहे हैं बल्कि उन्होंने अपनी कार्यक्षमता में भी वृद्घि महसूस की है।

हास्य का चमत्कार तो 104 साल की कस्तूरी सिंघई के रूप में भी देखा जा सकता है। उन्हें क्लब के लोगों के साथ नाचते-झूमते देख कर उनकी उम्र का अंदाज ही नहीं लगाया जा सकता। हास्य से मिली शक्ति का ही कमाल है कि वे अपने सारे कार्य स्वयं ही करती हैं। उन्हें चलने फिरने में परेशानी नहीं आती।

हंसी के इन दीवानों को रविवार की सुबह शहर के अनेक स्थानों पर देखा जा सकेगा। वे सुबह साढ़े छह बजे बोर्ड आफिस चौराहे से एक विशाल वाहन रैली निकालेंगे। उन्हें हंसते-गुदगुदाते देखने वाले भी बिना हंसे-मुस्कुराए नहीं रह सकेंगे क्योंकि रैली में उनकी पोशाक और भाव-भंगिमाएं भी अनूठी होगी।





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