भोपालस्थानीय केंद्रीय जेल के अधीक्षक पुरुषोत्तम सोमकुंवर के साथ इन दिनों एक गनमैन देखा जा सकता है। ऐसा इसलिए कि उन्हें अपनी ही जेल में बंद कुख्यात अपराधी तौफीक से जान का खतरा है। जिसके लिए जेलर साहब ने पुलिस से अपनी हिफाजत की गुहार की थी।
मामले की शुरुआत डेढ़ महीने पहले तब हुई जब दो हत्याओं का आरोपी तौफीक फरार था। जेल विभाग के एडीजी को लिखे पत्र में श्री सोमकुंवर ने कहा कि फरारी के दौरान ही तौफीक ने उन्हें कई बार जान से मारने की धमकी दी है। इसलिए उनकी रक्षा की जाए। गौरतलब है कि तौफीक कुछ साल पहले भोपाल जेल के डिप्टी जेलर पीडी श्रीवास्तव पर भी गोली चलाने का आरोपी है। इसलिए जेल विभाग ने श्री सोमकुंवर का पत्र भोपाल के पुलिस अधीक्षक जयदीप प्रसाद को सौंपा। इसके बाद जेलर साहब को सुरक्षा मुहैया कराई गई है। श्री प्रसाद ने जेलर के पत्र तथा उसे सुरक्षा देने की पुष्टि की है। तौफीक और श्री सोमकुंवर के बीच पुराना विवाद चल रहा है। जेल से जुड़े सूत्र बताते हैं कि तौफीक जेल में सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जेल प्रबंधन पर दबाव भी बनाता है।
तौफीक ने 30 जनवरी को ऐशबाग इलाके में गुड्डू जला की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके पहले उसने अक्टूबर में राजू श्रीवास्तव की भी गोली मारकर हत्या की थी। गुड्डू की हत्या उसने फरारी के दौरान की थी। शातिर बदमाश तौफीक पर पुलिस ने पंद्रह हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। उसने जेल अधीक्षक को धमकी फरारी के दौरान दी थी। जिला पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) तौफीक की तलाश में रात दिन एक किए हुई थी। लेकिन कुछ पुलिसकर्मियों की मिलीभगत के कारण वह नहीं पकड़ा जा सका। 21 फरवरी को अदालत में सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे। इस बीच तौफीक अदालत पहुंचा और मजिस्ट्रेट धर्मेद्र कुमार सिंह की अदालत में समर्पण कर दिया। उसने लल्लू रईस और मंसूर को भी जान से मारने की धमकी दी थी।