परमेश त्यागी/मदन लाल शर्मा. बिलासपुर (हरियाणा)‘साहब जी, मैं जिंदा हूं, गांव मिल्कड़ा में रहता हूं और हाल ही में १क् वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है।’ सरकारी दफ्तरों में बार-बार यह दोहराने वाला अनिल कुमार खुद को जिंदा साबित करने की चुनौती से जूझ रहा है। उसे हाल ही में पता चला है कि सरकारी दस्तावेजों में उसकी जन्म तिथि को मृत्यु तिथि बताया गया है।
आठ अप्रैल 1990 अनिल की जन्मतिथि है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस तारीख को उसकी मौत के रूप में दर्ज किया गया है। हरियाणा शिक्षा बोर्ड भिवानी द्वारा जारी की जाने वाली मार्कशीट कम डेट ऑफ बर्थ सर्टिफिकेट उसे मिल पाया नहीं था। अलबता उसने स्वास्थ्य विभाग से जन्म प्रमाण पत्र लेना चाहा। इस पर स्वास्थ्य विभाग के जन्म-मृत्यु पंजीयन कार्यालय ने अनिल कुमार को उसका मृत्यु प्रमाण पत्र थमा दिया। दरअसल, अनिल का जन्म मिल्कड़ा गांव में हुआ था, लेकिन गांव के चौकीदार ने भूलवश उसका नाम मृत्युदर रजिस्टर में लिख दिया था।
चौकीदार ने अप्रैल १९९क् में हुई गलती को लिखित तौर पर स्वीकार कर लिया है, लेकिन अनिल का संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। इस बारे में सीएमओ डॉ. जेआर बंसल कहते हैं कि इस प्रकार की गलती सामने आने पर सुधार दी जाएगी।