जोधपुर. जोधपुर में जन्म लेने वाले बच्चों में से 3 प्रतिशत बच्चे मंद बुद्धि होते हैं। जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी के टेप्से केंद्र से विशेष बीएड के विद्यार्थियों की ओर से शहर के विभिन्न इलाकों में किए गए सर्व्े में यह खुलासा हुआ है।
इस सर्व्े में परिवार के सदस्यों की स्थिति स्वास्थ्य की जानकारी के अलावा इन मंद बुद्धि बच्चों के शिक्षा की व्यवस्था के बारे में भी जानकारी इकट्ठी की गई। सर्वे में मानसिक विकलांगता वाले बच्चे के परिजनों को इन बच्चों के लिए सरकार की ओर से दी जाने वाली सुविधाओं से भी अवगत करवाया गया। इन विद्यार्थियों ने अपने दो शिक्षकों के निर्देशन में 5000 मकानों का सर्वे किया। जिसमें 160 से अधिक बच्चे मानसिक मंदता के शिकार पाए गए।
क्या आए सर्वे के नतीजे:
* मानसिक मंदता के बारे में गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जानकारी कम है।
* ऐसे बच्चों को माता पिता स्कूल नहीं भेज रहे है, क्योंकि सामान्य स्कूल में इन बच्चों को प्रवेश नहीं मिलता है।
* केंद्र सरकार व राज्य सरकार की घोषित सुविधाओं की इन परिवारों को जानकारी नहीं है।
कैसे हुआ सर्वे:
इस सर्वे को करने के लिए निदेशक डॉ. रवि गुंठे ने केंद्र के शिक्षक मनोजकुमार सैनी व डॉ नीता जैन के निर्देशन में दो दल बनाए। मनोजकुमार सैनी के नेतृत्व में सुरेश पारीक, नरेंद्र खींची, नरेंद्र पारीक, मनीषा गहलोत, लीलावती चौहान, भागीरथ शर्मा व ईश्वरसिंह शामिल थे। जबकि डॉ. नीता जैन की टीम में चंद्रकला गोस्वामी, दिलीप शर्मा, महेंद्र कुमार, शोभा चौधरी व हिमांशु चारण शामिल थे।
जोधपुर में 35 शिक्षकों की जरूरत:
टेप्से केंद्र के निदेशक रवि गुंठे का कहना है कि कुल बच्चों की संख्या के तीन प्रतिशत बच्चे मानसिक मंदता से पीड़ित पाए गए हैं। इन बच्चों को शिक्षा प्रदान करना जरूरी है। केवल 5 हजार घरों में पाए गए 160 बच्चों के लिए कम से कम 35 विशेष शिक्षकों की जरूरत है। सरकार को इन शिक्षकों की नियुक्तियां करनी चाहिए।
मंत्री ने प्रस्ताव ठुकराया:
विशेष बीएड का कोर्स करने वाले शिक्षकों का एक दल ने हाल ही जोधपुर प्रवास के दौरान तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी से मिला था और उन्होंने नियुक्ति की मांग की थी। देवनानी ने उन्हें स्पष्ट इनकार करते हुए कहा कि राज्य सरकार को अभी इस प्रकार के शिक्षकों की जरूरत नहीं है।