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दृष्टिदोष पीड़ित गगनबीर को तीन आईआईएम से बुलावा

अहमदाबाद भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) में प्रवेश पाना अनेक महत्वाकांक्षी विद्यार्थियों का सपना तो होता है परंतु इसे साकार गिने-चुने लोग ही कर पाते हैं, लेकिन अहमदाबाद के गगनबीर सिंह की बात कुछ और है। उन्हें एक साथ देश के तीन शीर्ष प्रबंधन संस्थानों ने प्रवेश का प्रस्ताव दिया है।

वे गंभीर किस्म के दृष्टिदोष से पीड़ित होने के बावजूद आईआईएम की संयुक्त प्रवेश परीक्षा (कैट) की वरीयता सूची में 92.63 परसेंटाइल रैंक के साथ पास हुए हैं। उन्होंने सहयोगी की मदद से कैट परीक्षा दी थी। तीनों आईआईएम ने ‘ पीडब्ल्यूडी’ (परसन विद डिसएबिलिटी) कोटे में उन्हें दाखिला देने का प्रस्ताव रखा है। कुछ निजी कारणों से उनके आईआईएम-बेंगलूर में दाखिला लेने की संभावना है। वैसे उनकी दिली चाहत आईआईएम-ए में पढ़ने की थी ।

कोचिंग वाले भी नहीं थे राजी : आंखों की जन्मजात बीमारी से पीड़ित गगनबीर को एक समय कोचिंग संस्थान तक ने प्रवेश देने से इनकार कर दिया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। बाद में वे एक कोचिंग क्लास में अस्थाई तौर पर बैठने की अनुमति पाने में सफल रहे। क्लास के पहले ही दिन तब प्रशिक्षक उनके कौशल का लोहा मान गए, जब गगनबीर के अलावा कोई भी विद्यार्थी सवालों का जवाब नहीं दे सका ।

यह है बीमारी :

गगनबीर की दृष्टि क्षमता 15 से 20 प्रति. ही है। वे स्वत: पढ़-लिख नहीं पाते। वे जिस बीमारी से पीड़ित हैं, उसमें उम्र के साथ देखने की क्षमता घटती जाती है।

मां की प्रेरणा का फल :

गगनबीर ने बताया, ‘मुझे आईआईएम-बेंगलूर, कोलकाता एवं कोझीकोड से प्रवेश का प्रस्ताव मिला है। यह सब मेरी मां हरिंदर कौर की कृपा का सुफल है। मां की प्रेरणा व आशीर्वाद से मेरा सपना सच हो गया है।’

यह बात और है कि वे अपने बेटे की सफलता को सराहने के लिए अब इस दुनिया में नहीं हैं। गगनबीर की कामयाबी से पूरा परिवार खुश है तथा गौरवान्वित महसूस कर रहा है।





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