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चित्तौड़ कलेक्टर की सजा पर स्टे

चित्तौड़गढ़. कलेक्टर पीएल अग्रवाल को कोर्ट की अवमानना के आरोप में तीन माह सिविल कारावास के अधीनस्थ न्यायालय के आदेश पर एडीजे कोर्ट ने अग्रिम आदेश तक के लिए रोक लगा दी है। एसीजेएम कोर्ट के हाल में दिए गए आदेश के विरुद्ध कलेक्टर की ओर से शनिवार को एडीजे कोर्ट प्रथम में अपील पेश की गई। उनकी ओर से वकील बसंतीलाल पोखरना व मदनलाल जैन ने सुप्रीम कोर्ट सहित राजस्थान व इलाहबाद हाइकोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए आदेश निरस्त करने की मांग के साथ सजा पर स्थगन आदेश का प्रार्थना पत्र भी अलग से पेश किया।

प्रार्थी वकील चांदमल गर्ग ने खुद बहस करते हुए इसका विरोध किया। पीठासीन अधिकारी बलजीत कौर मठारू ने बहस सुनने के बाद अधीनस्थ न्यायालय के आदेश की क्रियान्विति पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी।

यह कहा बहस में:
एसीजेएम कोर्ट द्वारा कोर्ट की अवमानना के आरोप में तीन माह सिविल कारावास व चल-अलच संपत्ति कुर्क करने के आदेश के खिलाफ पी.एल. अग्रवाल की ओर से एडीजे कोर्ट में बहस करते हुए वकील बसंतीलाल पोखरना व मदनलाल जैन ने कहा कि उनको कोर्ट के आदेश 13 अप्रैल, 2006 की अवमानना का दोषी ठहराना गलत है। अव्वल तो इस आदेश के समय वह यहां कलेक्टर पद पर ही नहीं थे। इसके अलावा अवमानना संबंधी अर्जी पर सुनवाई के दौरान कोर्ट से नियुक्त कमिश्नर की रिपोर्ट से यह परिलक्षित हो रहा है कि कोर्ट आदेश की पालना के भरसक व सार्थक प्रयास हुए हैं।

पार्किग पर 1.44 लाख रुपए खर्च:
कलेक्टर की ओर से कोर्ट को यह भी बताया गया कि कोर्ट व कलेक्ट्री परिसर में पार्किग बाबत अदालत के आदेश की पालना में कलेक्टर के आदेश पर ही पीडब्ल्यूडी ने स्वीकृत 3.60 लाख रुपए के बजट में से 1.44 लाख रुपए खर्च कर पार्किग स्थल सुनिश्चित किए। इसके अलावा एसपी की ओर से की गई पालना भी अग्रवाल के दिशा निर्देश पर ही हुई।





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