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धूम्रपान के विज्ञापन डालते हैं युवाओं पर बुरा प्रभाव

हाउस्टन. धूम्रपान भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामदास लगातार फिल्मी सितारों से अनुरोध करते रहे हैं कि वे परदे पर धूम्रपान संबंधी दृश्यों से परहेज करें क्योंकि युवाओं पर इसका गलत असर पड़ता है। अमेरिका के टेक्सास विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक नए शोध से भी इस तथ्य की पुष्टि हुई है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि पश्चिम की बयार में बहते भारतीय युवाओं पर धूम्रपान के विज्ञापनों का असर इतनी तेजी से होता है कि वे धूम्रपान को कई बार शौकिया शुरू कर देते हैं।

शोधकर्ता प्रोफेसर चेरयाल पेरी ने बताया कि मुझे यह देखकर आश्चर्य हुआ कि भारत के युवा धूम्रपान के विज्ञापनों से बहुत ज्यादा प्रभावित हैं।

उन्होंने कहा कि अध्ययन के दौरान हमारी टीम ने पाया कि धूम्रपान करने वालों में शहरी युवा आगे रहते हैं। कई युवा तो ऐसे हैं जिन्होंने विज्ञापनों के चलते हाल ही में धूम्रपान शुरू किया था।

शोधकर्ताओं को 2004 के एक अध्ययन के आंकड़ों ने शोध के लिए प्रेरित किया जिसमें पाया गया था कि भारत के स्कूलों में छठी कक्षा में पढ़ने वाले छात्र आठवीं के छात्रों की तुलना में तीन गुना अधिक धूम्रपान करते हैं। इस अध्ययन में 11,642 छात्रों को शामिल किया गया था।

इस अध्ययन के निष्कर्ष ‘हेल्थ बिहेवियर’ नामक जर्नल के ताजा अंक में प्रकाशित हुए हैं।

गौरतलब है कि भारत में 2004 में बने एक कानून के अनुसार सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करना प्रतिबंधित है, लेकिन तंबाकू उत्पाद बनाने वाली कंपनियों ने शॉपिंग मॉल सहित विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर वातानुकूलित धूम्रपान जोन बनाकर इसका हल निकाल लिया।





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