नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के एक मामले में उम्रकैद की सजा प्राप्त मुजरिम की सजा को घटाकर सात साल की कड़ी कैद में बदल दिया है। शीर्ष कोर्ट ने इस दलील के आधार पर सजा में बदलाव किया है कि मुजरिम ने यह कदम आत्मरक्षा में उठाया था।
जस्टिस एसबी सिन्हा और एचएस बेदी की डिवीजन बेंच ने कहा, ‘सबूतों से पता चलता है कि प्रभावित व्यक्ति न केवल कराटे विशेषज्ञ था, बल्कि चाकू से भी लैस था। ऐसे में इस बात में कोई आश्चर्य नहीं है कि अपीलकर्ता (आरोपी) के हाथ घायल हुए।’
आरोपी उदयकुमार पंढरीनाथ जाधव उर्फ मुन्ना तथा कराटे विशेषज्ञ शिवराज के बीच महाराष्ट्र में 22 अक्टूबर 1997 को झगड़ा हुआ था। शिवराज की हत्या के इस मामले में निचली अदालत ने मुन्ना को आईपीसी के सेक्शन 302 के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसे बॉम्बे हाईकोर्ट ने बरकरार रखा था।
मुन्ना ने शीर्ष कोर्ट में दलील दी थी कि उसका इरादा शिवराज की हत्या का नहीं था। शिवराज ने कराटे विशेषज्ञ होने का लाभ उठाकर उस पर चाकू से हमला किया। इस पर मुन्ना ने शिवराज से चाकू छीना और उसे घायल कर दिया जिससे बाद में उसकी मौत हो गई।