भोपाल. लंबे समय से वक्री चल रहे शनि शनिवार रात से मार्गी हो गए हैं। साल के अंत तक वे सीधे ही चलेंगे, परंतु गुरु ने यकायक रफ्तार इतनी तेज कर दी है कि वे धनु से मकर राशि में जा पहुंचे हैं। वे इस राशि में 29 मई तक ही रहेंगे। फिर धनु में ही लौट आएंगे। गुरु 22 मई को ऐसे वक्री होंगे कि फिर एक सितंबर को ही मार्गी होंगे। गुरु का वक्री होना सोना समेत पीली वस्तुओं के भाव तेज करेगा वहीं धार्मिक उन्माद भी बढ़ाएगा।
पं. भंवरलाल शर्मा ने बताया कि शनि सिंह राशि में ही मार्गी हो गए हैं। इससे उन लोगों को कुछ राहत मिल सकती है, जिन पर शनि की साढ़े साती चल रही है, परंतु मंगल और केतु के कर्क में एक साथ होने से दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्रों में जल संकट गहराने, आगजनी, तूफान आदि प्राकृतिक प्रकोप बरप सकते हैं।
पं. प्रहलाद पंड्या ने बताया कि गुरु के वक्री रहते धार्मिक उन्माद पनप सकता है। धर्माचार्यो को परेशानियां होंगी। लंबे समय तक शनि वक्री रहे। अब मार्गी होने पर उन लोगों को फायदा पहुंचाएंगे, जिनकी कुंडली में वे लाभ स्थान में हैं। मंगल व केतु गर्मी में इजाफा करेंगे। साथ ही राजनैतिक अस्थिरता को बढ़ावा देंगे।