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दूध की कीमतें अन्य शहरों से ज्यादा

भोपाल. इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर आदि शहरों के मुकाबले भोपाल में दूध के भाव ज्यादा हैं। फिर चाहे पैकेट वाला दूध हो या बाजार में मिलने वाला खुला दूध। दूध विक्रेताओं का कहना है कि भोपाल इलाके में दूध का उत्पादन कम होने के कारण यहां दूध महंगा बिकता है। यही कारण है कि दूध से बने उत्पाद मठा, दही, लस्सी आदि की कीमत भी भोपाल में अन्य शहरों की तुलना में ज्यादा है।

गर्मी के मौसम में दूध का उत्पादन कम होने से शहर में इसके भाव काफी बढ़ गए हैं। पिछले महीने से जहां भोपाल सहकारी दुग्ध संघ ने भाव बढ़ा दिए हैं, वहीं बाजार में खुले दूध की कीमतें भी काफी बढ़ गई हैं। बाजार में अच्छी क्वालिटी का दूध 26 से 28 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। जबकि मार्च तक दूध 22 से 24 रुपए किलो बिक रहा था।

उदाहरण के तौर पर लस्सी और नमकीन मठा की बात करें तो लस्सी 14 रुपए प्रति गिलास और नमकीन मठा का 200 मिलीलीटर का पैकेट पांच रुपए में मिल रहा है। इसके उलट इंदौर में लस्सी 10-12 रुपए की और नमकीन मठा का 200 मिलीलीटर का पैकेट तीन रुपए में मिल रहा है। एमपी नगर के एक सांची पार्लर संचालक का कहना है कि कई दफा मठा की कीमतों में अंतर को लेकर इंदौर से आए लोग शिकायत करते हैं।

न्यू मार्केट में दूध के थोक विक्रेता पंकज डंग का कहना है कि ग्वालियर, उज्जैन, इंदौर क्षेत्र में दूध का उत्पादन भोपाल की तुलना में ज्यादा होता है। इंदौर, उज्जैन में सांची के दूध की खपत कम है, वहां लोग डेयरी से दूध खरीदते हैं। दूध में कमी की वजह से न सिर्फ मठा, लस्सी, दही आदि के भाव यहां कुछ ज्यादा हैं, बल्कि मिठाइयां भी महंगी हैं।

दही की सप्लाई बंद
सांची ने करीब 15 दिन पहले ‘बायो मैजिक’ नाम से बाजार में दही उतारा था। 180 ग्राम का पैकेट 12 रु. का है। लोगों ने इसे काफी पसंद किया था। पर एक हफ्ते से सप्लाई रोक दी गई है। सांची पार्लर संचालकों का कहना है कि ग्राहक बायो मैजिक दही खरीदने आते हैं, पर दही उपलब्ध न होने से उन्हें वापस जाना पड़ता है।

>> पशुपालकों को पशुपालन को लेकर जागरूक कर दूध की कमी को दूर किया जा सकता है। बाहर से दूध मंगाना समस्या का समाधान नहीं है, क्योंकि दूध को खराब होने से बचाने और परिवहन में काफी खर्च आता है। इंदौर, उज्जैन के पशुपालक प्रोफेशनल हैं। यहां के पशुपालकों को चाहिए कि वे पशुओं को खाने में विटामिन और मिनरल्स दें और उन्हें समय पर कृमिनाशक दवाएं दें।
डा. यूडी सक्सेना, सेवानिवृत्त, उपसंचालक, पशुपालन विभाग

>> दूध उत्पादकों से जिस कीमत पर दूध प्राप्त होता है, उसी के आधार पर कीमतें तय होती हैं। इसमें दूध संग्रहण, परिवहन आदि का खर्च भी शामिल होता है।
आलमगीर खान, सीईओ, भोपाल सहकारी दुग्ध संघ





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