भोपाल.
अगर आपको अचानक मुंबई, कोलकाता, चेन्नई या देश के किसी अन्य महानगरों तक रेल यात्रा करनी हो तो पहले से आरक्षण करवा लें, क्योंकि इन जगहों के लिए भोपाल से तत्काल आरक्षण का कोटा नहीं है। लखनऊ जाने वाली पुष्पक एक्सप्रेस में तो यह सुविधा है, लेकिन मुंबई जाने वाली इसी ट्रेन को इस सुविधा से दूर रखा गया है।
राजधानी से होकर गुजरने वाली महानगरों की किसी भी ट्रेन में तत्काल आरक्षण कोटे की सुविधा नहीं है। इलाहाबाद को रोजाना जाने वाली कामायनी एक्सप्रेस में तत्काल और इमरजेंसी दोनों कोटे नहीं हैं। रात 10 बजे के बाद सुबह तक दिल्ली जाने वाली किसी भी ट्रेन में तत्काल और इमरजेंसी कोटा नहीं है। गोवा के लिए एकमात्र गोवा एक्सप्रेस को भी दोनों कोटों से वंचित रखा गया है। देश की दिल्ली से अन्य प्रदेशों की राजधानियों को जाने वाली आधा दर्जन ट्रेनों में किसी प्रकार का कोटा नहीं है।
क्या है तत्काल कोटा- यात्री को ट्रेन के शुरुआती स्टेशन से अंतिम स्टेशन तक पूरा किराया चुकाना पड़ता है। चाहे यात्रा उसने किसी भी स्टेशन से कहीं तक की भी की हो। इसके लिए किराए के अलावा स्लीपर श्रेणी में 150 रुपए और एसी के लिए 300 रुपए का अतिरिक्त भुगतान भी देना पड़ता है।
>> तत्काल और वीआईपी कोटे का निर्धारण नीतिगत मामला है। यह रेलवे बोर्ड तय करता है कि किस ट्रेन और किस मंडल को कितना कोटा देना है। आवश्यकता पड़ने पर मंडल समय-समय पर मुख्यालय को पत्र लिखकर ट्रेनों में कोटे की मांग करता है।
अशोक कुमार अग्रवाल, डीआरएम
>> राजधानी की बढ़ती तादाद के हिसाब से ट्रेनों में तत्काल कोटा आवश्यक है। रेलवे सुविधाओं के मामले में देश के अन्य प्रदेशों की राजधानी के मुकाबले भोपाल के साथ अछूता व्यवहार किया जा रहा है। भोपाल का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसदों को रेल मंत्री और बोर्ड से चर्चा करनी चाहिए।
नरेंद्र माथुर, सदस्य, प.-मध्य उपयोगकर्ता सलाहकार समिति