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मेंटेनेंस बना मजाक आधा शहर अंधेरे में

बिलासपुर. ठेके की विद्युत व्यवस्था के बाद भी शहर के ज्यादातर इलाकों में अंधेरा छाया हुआ है। नगर निगम ने व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नियम कानून तो बनाए हैं, लेकिन वे कागजों तक ही सीमित हैं।

नगर निगम प्रशासन ने विद्युत व्यय में 30 फीसदी कमी लाने की शर्त अक्टूबर माह से शहर के साढ़े आठ हजार विद्युत खंभों की स्ट्रीट लाइट के रखरखाव का ठेका नागपुर की दावनगले इन्फोटेक लिमिटेड को दिया है। तय समझौते के मुताबिक चोक राड आदि का मेंटेनेंस कंपनी द्वारा किया जाता है। यदि तीन दिन से अधिक कोई लाइट बंद है, तो इस पर निगम को पेनाल्टी लगाने का अधिकार है।

लेकिन गली मुहल्ले तो दूर, शहर के मुख्यमार्गो की विद्युत व्यवस्था ही ठप पड़ी है। लाइट चालू व बंद करने का कोई समय ही नहीं है। कंपनी के अधिकारी बिल में कमी लाकर अपनी जेबें भरने विद्युत मंडल के अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर तरह-तरह की तरकीब आजमा रहे हैं। यही वजह है कि सड़कों की स्ट्रीट लाइट से ज्यादा पावर की लाइट निकालकर कम पावर की लाइट लगाई जा रही है। बिजली चालू-बंद होने का कोई तय समय नहीं है।

कभी शाम को सात बजे लाइट चालू की जाती है, तो कभी रात आठ बजे। वहीं देर रात शहर के ज्यादातर हिस्से की स्ट्रीट लाइट बंद कर दी जाती है। सभापति के मुहल्ले गोड़पारा में दिन में भी बिजली जलती है। वहीं टिकरापारा, दयालबंद, इमलीपारा, निरालानगर, कुदुदंड, जरहाभाटा, व्यापार विहार, विद्यानगर, विनोवानगर, तालापारा बस्ती, मगरपारा रोड समेत अन्य मुहल्लों में आए दिन अंधेरा छाया रहता है।

निगम के अफसरों का कहना है कि यह ठेका नही,एक समझौता है। इसके तहत अलग-अलग लाइट की अलग-अलग दर तय किए गए हैं। पूर्व में नगर निगम शहर के साढ़े आठ हजार विद्युत खंभों व २५ रोड डिवाइडरों में लगी लाइट के एवज में विद्युत मंडल को सात से आठ लाख रुपए मासिक बिल का भुगतान करना पड़ता था। छह माह तक कंपनी के कर्मचारियों द्वारा मेंटेनेंस किया जा रहा था।

इस माह से कंपनी निगम को बचत देगा, इसके आधार पर ३क् फीसदी बचत केलकुलेट कर कंपनी को राशि का भुगतान नगर निगम द्वारा किया जाएगा। इसी के तहत निगम प्रशासन ने कंपनी का पेमेंट रोककर रखा है, इन छह महीेने में निगम प्रशासन द्वारा कंपनी को २क्-२२ लाख रुपए का भुगतान किया जा चुका है।

नगर निगम के कार्यपालन यंत्री सुधीर गुप्ता का कहना है कि कंपनी के संचालक ने नोटिस के जवाब में शहर की विद्युत व्यवस्था को दुरुस्त करने एक पखवाड़े का समय निगम प्रशासन से मांगा है। निगम का दबाव रहे, इसलिए चुगी दफ्तर का कार्यालय एक हजार रुपए महीने में दिया गया है। कंपनी एक पखवाड़े के अंदर अपना स्काई लिफ्ट वाहन ला रहा है, तब तक के उपयोग के लिए कंपनी को यह वाहन दिया गया है।

व्यवस्था लड़खड़ाई: निगम प्रशासन के अफसर भी मानते हैं कि तीन-चार माह से शहर की विद्युत व्यवस्था चरमरा गई है। महापौर ने कंपनी के संचालक का नोटिस जारी कर तलब किया और एक पखवाड़े के अंदर विद्युत व्यवस्था दुरुस्त करने का निर्देश दिया है।





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