जालंधर
एक तरफ जहां भ्रूण हत्या जोरों पर है, वहीं कुछ ऐसी महिलाएं भी हैं जो एक या दो बेटियों पर फैमिली प्लानिंग करवा रही हैं। इसमें सिर्फ एजुकेटीड महिलाएं ही नहीं बल्कि कम पढ़ी-लिखी महिलाएं भी है जिन्होंने ऐसा कर समाज के सामने मिसाल कायम की है कि लड़के और लड़कियों में कोई फर्क नहीं है।
लड़के और लड़की में कोई फर्क नही
गाइनाकॉलोजिस्ट अंशुमाला सोहल बताती हैं कि मेरी दो बेटियां हैं कृषी जोकि आठ साल की है और हेमल एक साल की है उनका कहना है कि मैनें बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए दो बेटियों पर ही फैमिली प्लानिंग करना ठीक समझा। शुरू में ही मैं निर्णय ले चुकी थी कि दो बच्चों से ही हमारा परिवार पूरा हो जाएगा। फिर चाहे लड़का हो लड़की। क्योंकि आजकल लड़के और लड़कियों में कोई फर्क नहीं है। देश की बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए भी यह निर्णय बिल्कुल सही है।
कभी लड़के का विचार नही आया
कांता चौहान कहती हैं कि मेरी दो बेटियां हैं मोनिक और सुचेता लेकिन मेरे मन में कभी ऐसा विचार नहीं आया कि मुझे एक बेटा होना चाहिए। अगर आप अपने आसपास ही देखें कि कितने पेरैंट्स हैं जो अपने बच्चों के साथ रहते हैं। लड़की अगर ससुराल जाती है तो लड़कों को भी तो जॉब के सिलसिले में दूसरे शहरों में जाना पड़ताहै। मुझे अपनी बेटियों पर नाज है आज मेरी दोनों बेटियां पीसीएस कर चुकी हैं और इंडीपैंडेंट हैं। आज बेटियां भी हर वो काम कर सकती हैं जो एक बेटा कर सकता है। इसीलिए कभी भी मन में बेटे का विचार नहीं आया।
बच्चे तो बच्चें होते हैं रमनिता सैनी शारदा कहती हैं कि मेरी दो बेटियां है आसावरी और शिवरंजनी उनके बाद कभी भी मैनें बेटे के बारे में नहीं सोचा क्योंकि मैं तो यही सोचती हूं कि उनमें कैसा फर्क। आज लड़कियां हर फील्ड में लड़कों से आगे हैं। तो फिर लड़के लड़की में कैसा फर्क। मां -बाप के लिए सभी बच्चें एक जैसे होते हैं।
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अमिता शर्मा का कहना है कि उनके यहां आने वाली महिलाओं में 30 प्रतिशत महिलाएं दो लड़कियों पर ही फैमिली प्लानिंग करवा रही हैं। धीरे-धीरे नई पीढ़ी में तेजी से यह बदलाव आ रहा है। हमारे पास कई ऐसी महिलाएं भी आई हैं जिन्होंने एक लड़की के बाद ही फैमिली प्लानिंग करवा ली है। शहरों में रहने वाली 70 प्रतिशत महिलाओं की मानसिकता बदल गई है। मैं 20 साल से इस प्रोफेशन में हूं। पहले महिलाएं ऑपरेशन करवाने के लिए सास से इजाजत लेती थीं, लेकिन अब पति-पत्नी खुद मिलकर यह निर्णय ले रहे हैं। नई जनरेशन के लड़कों की सोच पहले जैसी नहीं रह गई है। वैसे भी लड़कियों को लक्ष्मी का अवतार माना जाता है।