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हर जगह ‘पानी जागरण’

जयपुर. water

केस 1 : जादौन नगर-ए में सुबह 4:48 पर पानी आया। प्लाट नंबर 512 में रहने वाले परिवार के तीन जने पानी भरने में जुट गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस कॉलोनी में कई बार तो तड़के साढ़े 3 बजे भी पानी आ जाता है और कभी-कभी तो पानी का प्रेशर इतना कम होता है कि नलों में पानी ही नहीं आता। एडवोकेट अरुण चौधरी ने बताया कि मेरी पत्नी पानी के चक्कर में रातभर ठीक से नहीं सो पाती।

केस 2 : दुर्गापुरा रेलवे स्टेशन के पास शांति नगर सहित आधा दर्जन कॉलोनियों में रात ढाई बजे से ही लोग जगे हुए मिले। पानी 3:30 पर आया। शांति नगर कॉलोनी के प्लॉट नंबर 2 की गृहिणी संतोष शर्मा ने बताया कि उन्हें तो रात और सुबह के बीच केवल पानी का ही इंतजार रहता है।

केस 3 : बजरंग कॉलोनी के राधेश्याम शर्मा ने बताया कि इस क्षेत्र में साढ़े चार से करीब छह बजे तक पानी की सप्लाई होने की गलत परंपरा बन गई है। अगर किसी व्यक्ति की नींद सुबह 6 बजे बाद टूटती है तो समझ लीजिए कि उस दिन उसे 300 रुपए में टैंकर मंगवाकर गलती भुगतनी पड़ती है।

केस 4 : मुरलीपुरा की रामेश्वर धाम कॉलोनी के रामकिशन यादव ने बताया कि सुबह होने के इंतजार में रात खुली आंखों में ही कट जाती है। सुबह पांच बजे से पौन घंटे तक बहुत कम दबाव में पानी आता है, जिससे तीन बाल्टियां ही भर पाती हैं। नई पाइपलाइन लगने से भी कॉलोनीवासियों को कोई फायदा नहीं हुआ।

दुर्गापुरा, झोटवाड़ा, मुरलीपुरा, पृथ्वीराज नगर, आमेर, परकोटा सहित शहर के कई हिस्सों में अल सुबह पानी आने का सिलसिला जारी रहने से करीब एक लाख लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। ये लोग पानी के इंतजार में रात को ठीक तरह से नींद भी नहीं ले पा रहे हैं।

जलदाय विभाग के एसई आर.पी. माथुर का कहना है कि तकनीकी कारणों से जयपुर की 30 लाख की आबादी को एक ही समय पानी सप्लाई करना नामुमकिन है। जोनवाइज स्तर पर कुछ कॉलोनियों में अल सुबह पानी की सप्लाई की जा रही है, जिसे बदलना होगा। अल सुबह की सप्लाई पांच दिन से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। बाकी दिन अन्य कॉलोनियों के समय में फेरबदल करके इस समस्या को कम किया जा सकता है।

कहीं पीने को नहीं और कहीं बह रहा है व्यर्थ
शहर के अधिकांश इलाकों में जहां पीने के पानी की किल्लत है, वहीं झोटवाड़ा रोड, शास्त्रीनगर रोड व प्रतापनगर सेक्टर-5 क्षेत्र के एक दर्जन से ज्यादा लीकेजों से रोजाना सैकड़ों लीटर पानी व्यर्थ बह रहा है।

पाइपलाइन में रिसाव से पानी का प्रेशर तो कम होता ही है, साथ में सड़क भी क्षतिग्रस्त हो रही है। जलदाय विभाग के इंजीनियरों की लापरवाही के कारण सड़क पर गड्ढे हो गए हैं, जो राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। विभाग के इंजीनियर अक्सर ट्रैफिक पुलिस की अनुमति नहीं मिलने का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ने की कोशिश करते हैं।

प्रतापनगर सेक्टर-5 में पानी की टंकी के पास पाइपलाइन से लंबे समय से पानी बह रहा है। स्थानीय लोगों की शिकायत के बावजूद पाइपलाइन की मरम्मत नहीं हो रही है। झोटवाड़ा रोड पर पाइपलाइन में लीकेज से रोजाना सैकड़ों लीटर पेयजल बह रहा है। पावर हाउस पर थोड़ी-थोड़ी दूर तीन लीकेज हैं। स्पेस सिनेमा के सामने हो रहे लीकेज से भी राहगीरों को परेशानी हो रही है।

यहां से रोजाना जलदाय विभाग के एक्सईएन, एईएन व जेईएन कई बार गुजरते हैं, फिर भी इन्हें सही करने की कार्रवाई नहीं की गई। शास्त्रीनगर रोड पर बने लीकेज से भी रोजाना पानी बह रहा है। अमानीशाह नाले के पास एक ही स्थान पर आधा दर्जन लीकेज हैं। बर्फखाना निवासी राकेशकुमार खंडेलवाल ने बताया कि शिकायत पर हर बार टालने की कोशिश की जाती है।

एईएन विजय पारीख ने बताया कि अधिकांश लीकेज कनेक्शन की पाइपलाइन से हैं। ट्रैफिक पुलिस की ओर से लीकेज सही करने की अनुमति नहीं मिल रही है। अनुमति मिलते ही सभी लीकेज सही करवा दिए जाएंगे।





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