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..बाबा हम भी जमीन वाले हो गए

अंबाला. बाबा हम केस जीत गए। क्या.. दोबारा बोलो बेटा यकीन नहीं होता। और फिर इसके बाद दादा और पोता दोनों की आंखें नम हो र्गई। अंबाला छावनी की जमीन का मालिकाना हक अदालत ने बबियाल गांव के पक्ष में दिया। केस जीतने पर गांव के युवक अशोक ने अपने दादा को जब यह जानकारी दी तो उनकी आंखें नम हो र्गई। यह आंसू खुशी के थे। जिसमें छिपा था एक गर्व, आश्वासन और स्वाभिमान। जमीन किसान के लिए क्या है, आपको यह महसूस करना है तो इन दिनों अंबाला छावनी के साथ लगते बबियाल गांव में आ जाए। यहां आपको पता चल जाएगा कि अपनी जमीन से कट कर किसान कैसे छटपटाता है। जब उसे अपनी जमीन का हक मिलता है तो वह कितना खुश होता है। शनिवार से ही गांव में दिवाली मन रही है।

अंबाला जिले का गांव बबियाल :

कल तक इस गांव के अधिकतर लोगों के पास जमीन का एक टुकड़ा भी नहीं था, लेकिन अदालत के एक निर्णय ने उन्हें जमींदार बना दिया। गांव के सरपंच दुर्गादास कहते हैं कि कागजों में ही सही हम जमींदार तो हो गए। अदालत ने उन्हें जमीन का मालिक तो माना। देर सवेर जमीन भी मिल जाएगी।

बबियाल गांव मूल रूप से किसानों का गांव है, लेकिन 1843 में यहां की अधिकतर जमीन का अंग्रेजों ने सेना के लिए अधिग्रहण कर लिया था। मुआवजा तय किया था नौ पाई प्रति बीघा। जमीन अधिग्रहण का यह सिलसिला ऐसा चला कि कभी पावर स्टेशन के नाम तो कभी दूसरे काम के लिए यहां की जमीन छीनी जाती रही। जो थोड़ी बहुत जमीन रह गई थी, वह गांव के लोगों ने बेच दी। क्योंकि कम जमीन पर खेती करना मुश्किल हो गया था। गांव में अब अधिकतर लोगों के पास जमीन नहीं है।

शुरू हुई अपनी जमीन की जंग 1993 में गांव के ज्ञान सिंह, नंद लाल, चमन सिंह, जयसिंह, दया राम व दुर्गादास समेत करीब 143 लोगों ने जमीन के मालिकाना हक के लिए अदालत में प्रार्थना पत्र दिया और लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी।

शनिवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने गांव वालों के पक्ष में निर्णय दे दिया। सरपंच दुर्गा दास ने बताया कि यह लड़ाई आसान नहीं थी। शुरूआत में तो लोग उन्हें बेवकूफ ही कहते थे। लेकिन उन्हें पता था अपनी जमीन का हक जरूर मिलेगा।

आधुनिक खेती करेंगे : गांव के युवक कहते हैं कि जमीन सेना से खाली होते ही यहां वे आधुनिक खेती करेंगे। मसलन फूल और फल के साथ-साथ एग्रोनामी करेंगे। गांव के युवक अशोक, राजकुमार, रणबीर व दीपक आदि ने बताया कि अभी जमीन मिलने में वक्त लगेगा, लेकिन उनका सपना है कि वे सोसायटी बना कर खेती करें और कृषि में अपने गांव का नाम चमकाएं।





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